Dharma Sangrah

श्रीमंगलग्रह मंदिर में रविवार को भव्य महिला कृषि मेले का आयोजन

Webdunia
शनिवार, 21 जनवरी 2023 (16:10 IST)
अमलनेर- Shri Mangal Dev Grah Mandir Amalner: अंतरराष्ट्रीय पौष्टिक अनाज वर्ष 2023 के अवसर पर महाराष्ट्र के जलगांव के पास अमलनेर में स्थित प्राचीन मंगलदेव ग्रह मंदिर के प्रसादालय में 22 जनवरी 2023 रविवार के दिन दोपहर 12 बजे महिला कृषि सभा का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का मार्गदर्शन बीजमाता राहीबाई पोपेरे करेंगी।
 
सभा की अध्यक्षता कृषि विभाग के जिला अधीक्षक संभाजी ठाकुर करेंगे। उप निदेशक कृषि अनिल भोकारे, कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी दादाराव जाधव, तालुका कृषि अधिकारी भरत वंजारी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।
बिजमाता पोपेरे मार्गदर्शन करेंगी : अहमदनगर जिले की बीजमाता के नाम से प्रसिद्ध राहीबाई पोपेरे अब तक 54 फसलों की 116 किस्मों के गवरन बीजों का संरक्षण कर चुकी हैं। राहीबाई की प्रेरणा से नासिक और नगर जिलों में 400 एकड़ भूमि पर गवरन किस्मों की खेती की जा रही है और उनके द्वारा सहेजे गए बीजों का उपयोग राज्य के कई जिलों और विदेशों में किया जा रहा है। 
 
उन्होंने बैंगन, भिंडी, अमरूद, आम, पालक, मेथी, मटर आदि के बीज तैयार किए हैं। उन्हें कृषि के क्षेत्र में उनके काम के लिए राज्य सरकार सहित विभिन्न संगठनों से पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आयोजकों ने अपील की है कि कृषि के क्षेत्र में नवाचार का काम करने वाली महिलाएं इस सभा में जरूर शामिल हों।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Next PM after Modi:नरेंद्र मोदी के बाद पीएम कुर्सी की जंग अब सिर्फ 2 लोगों के बीच

Phalgun Festivals List 2026 : हिंदू कैलेंडर का अंतिम माह, फाल्गुन मास, जानिए इसका महत्व और व्रत त्योहारों की लिस्ट

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब रहेगा, भारत में सूतककाल का समय क्या है?

मकर राशि में त्रिग्रही योग से बने रुचक और आदित्य मंगल योग, 4 राशियों की किस्मत चमकाएंगे

February 2026 Festivals: फरवरी माह के प्रमुख व्रत एवं त्योहार

सभी देखें

धर्म संसार

शुक्र का शतभिषा नक्षत्र में गोचर, 4 राशियों को मिलेगा राहु का आशीर्वाद

शबरी की भक्ति से रामराज्य का मार्ग

फाल्गुन मास की अमावस्या कब है, क्या है इसका महत्व, जानिए मुहूर्त और करें उपाय

शनि और मंगल का मीन के मैदान पर होगा युद्ध, 5 राशियां होंगी विजेता

जानकी जयंती, माता सीता की पूजा का महत्व और कथा

अगला लेख