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श्राद्ध पक्ष 2026: 60 साल बाद 16 श्राद्ध इस बार 16 नहीं 15 दिनों का, शुभ संयोग भी

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16 Shraddh Paksha 2026
यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दुर्लभ खगोलीय व धार्मिक संयोग है। साल 2026 में श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष) में तिथियों के क्षय होने के कारण 16 श्राद्ध की अवधि 16 दिनों की न होकर 15 दिनों की ही रहेगी। ऐसा दुर्लभ संयोग लगभग 60 वर्षों बाद बन रहा है। इससे पहले 1966 में यह संयोग था। इस संयोग के साथ ही और भी कई योग बन रहे हैं।

क्यों हो रहा है यह संयोग?

हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्योदय के समय एक तिथि होती है और अगले सूर्योदय से पहले ही वह समाप्त हो जाती है, तो उसे 'तिथि का क्षय' (घाटा) माना जाता है।
 
तारीख और समय (2026): वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत सितंबर 2026 (भाद्रपद पूर्णिमा) से हो रही है।
 
तिथि क्षय का कारण: इस दौरान पंचांगीय गणना के अनुसार दो तिथियां (जैसे पंचमी और अष्टमी या अन्य दो तिथियां) एक ही दिन पड़ रही हैं, जिससे कुल दिनों की संख्या 16 से घटकर 15 रह जाएगी।
 
पंचमी और अष्टमी: श्राद्ध कर्म कतुप काल,अपरान्ह काल और रोहिणी काल में करते हैं। इस दृष्टि से पंचांग भेद अनुसार कुछ पंचमी तो कुछ अष्टमी तिथि का क्षयबता रहे हैं।

शुभ संयोग: 

शनिवार का  संयोग: इस बार श्राद्ध पक्ष शनिवार से प्रारंभ होक शनिवार पर समाप्त होंगे। पूर्णिमा का श्राद्ध 26 सितंबर 2026 शनिवार को रखा जाएगा और सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध 10 अक्टूबर 2026 शनिवार के दिन रहेगा। 
 
अन्य योग: भले ही दिन कम हो रहे हों, लेकिन इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो पितरों के तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी माने जाते हैं।
 
कन्या राशि में सूर्य: श्राद्ध कर्म तब करते हैं जब सूर्यदेव कन्या राशि में होते हैं। 
 

श्राद्ध पक्ष में ध्यान रखने योग्य मुख्य बातें

तिथि अनुसार श्राद्ध: यदि दो तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं, तो विद्वान पंडितों व पंचांग के अनुसार निर्धारित समय पर ही संबंधित पूर्वज का तर्पण और श्राद्ध कर्म करें।
 
सर्वपितृ अमावस्या: जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश छूट गया हो, उनका श्राद्ध अंतिम दिन सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर किया जाता है।
 
कुतप काल का महत्व: श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय (कुतप काल - दोपहर लगभग 11:30 से 12:30 के बीच) में ही करना श्रेष्ठ माना गया है।
 

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