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श्री शाकंभरी माता की महिमा, पढ़ें पौराणिक कथा

WD Feature Desk
HIGHLIGHTS
* शाकंभरी नवरात्रि में माता का पूजन किया जाता है। 
* दुर्गा अवतारों में शाकंभरी माता काफी प्रसिद्ध हैं। 
* इस नवरात्रि में शांकभरी देवी कथा पाठ अवश्‍य करना चाहिए।

Shakambhari Navratri Story : वर्ष 2024 में 18 जनवरी, गुरुवार से शाकंभरी नवरात्रि का प्रारंभ हो गया है। शाकंभरी देवी दुर्गा के अवतारों में से एक मानी गई हैं। दुर्गा अवतारों में मां रक्तदंतिका, भीमा, भ्रामरी, शताक्षी तथा शाकंभरी अधिक प्रसिद्ध हैं। अत: नवरात्रि में इनका पूजन, कथा पाठ, मंत्र जाप आदि अवश्‍य ही करना चाहिए। आइए जानते हैं यहां शाकंभरी देवी की पौराणिक कथा के बारे में- 
 
शाकंभरी देवी की कथा:Devi Shakambari katha 
 
मां शाकंभरी की पौराणिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, एक समय जब पृथ्‍वी पर दुर्गम नामक दैत्य ने आतंक का माहौल पैदा किया। इस तरह करीब सौ वर्ष तक वर्षा न होने के कारण अन्न-जल के अभाव में भयंकर सूखा पड़ा, जिससे लोग मर रहे थे। जीवन खत्म हो रहा था। उस दैत्य ने ब्रह्माजी से चारों वेद चुरा लिए थे।
 
तब आदिशक्ति मां दुर्गा का रूप मां शाकंभरी देवी में अवतरित हुई, जिनके सौ नेत्र थे। उन्होंने रोना शुरू किया, रोने पर आंसू निकले और इस तरह पूरी धरती में जल का प्रवाह हो गया। अंत में मां शाकंभरी दुर्गम दैत्य का अंत कर दिया।
 
एक अन्य कथा के अनुसार शाकुम्भरा (शाकंभरी) देवी ने 100 वर्षों तक तप किया था और महीने के अंत में एक बार शाकाहारी भोजन कर तप किया था। ऐसी निर्जीव जगह जहां पर 100 वर्ष तक पानी भी नहीं था, वहां पर पेड़-पौधे उत्पन्न हो गए।

यहां पर साधु-संत माता का चमत्कार देखने के लिए आए और उन्हें शाकाहारी भोजन दिया गया। इसका तात्पर्य यह था कि माता केवल शाकाहारी भोजन का भोग ग्रहण करती हैं और इस घटना के बाद से माता का नाम 'शाकंभरी माता' पड़ा। 
 
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