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आज के शुभ मुहूर्त

(संकष्टी चतुर्थी)
  • तिथि- चैत्र कृष्ण तृतीया
  • त्योहार/व्रत/मुहूर्त- संकष्टी गणेश चतुर्थी
  • राहुकाल: सुबह 11:10 से दोपहर 12:35 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 से 12:56 तक
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मां शैलपुत्री के बारे में ये 7 बातें आप नहीं जानते होंगे

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Form of Maa Shailputri
वर्ष में चार नवरात्रियां आती हैं। आश्‍विन माह में शारदीय नवरत्रि का पर्व मनाया जाता है। 26 सितंबर 2022, सोमवार से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गई है। इस बार माता हाथी पर सवारी होकर आयीं हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। नवरात्रि के यह त्योहार 4 अक्टूबर 2022 तक चलेगा। प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। कौन है मां शैलपुत्र और किस कारण होती है उनकी पूजा एवं आराधना? 
 
शैलपुत्री | Shailputri
वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ । 
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥
 
1. शैल का अर्थ होता है पर्वत। शैलराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।
 
2. मां शैलपुत्री माता वृषभ पर सवार हैं।
 
3. इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है।
 
4. इनकी आराधना से हम सभी मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। 
 
5. इनका मंत्र है-  ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:। या ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।
 
6. प्रतिपदा तिथि को नैवेद्य के रूप में गाय का घी मां को अर्पित करना चाहिए।
 
7. इस दिन पीला रंग पहनना शुभ है। इसीलिए नवरात्रि की शुरुआत पीले रंग के कपड़ों से करें।

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