संघर्षों में जीवन उसका, हर पल ही ढलता रहा। दीया रात में जलता रहा, दीया रात में जलता रहा। 1. रोशनी के रोजगार में, रोज सूखती बाती। हल्की हवा के झोंके से, लौ भी हिल-डुल जाती। ख्वाब अंधेरों से लड़ने का, सपनों में पलता रहा। दीया रात में...