Hanuman Chalisa

Pandemic Time | कैसा भी कफ हो इन 2 योग क्रियाओं से निकल जाता है बाहर

अनिरुद्ध जोशी
हठयोग में शुद्धि क्रियाओं का बहुत महत्व है। क्रियाओं में प्रमुख है- नेती, धौती, बस्ती, कुंजर, न्यौली, त्राटक आदि। उक्त क्रियाओं के अभ्यास से संपूर्ण शरीर शुद्ध हो जाता है। किसी भी प्रकार की गंदगी जब शरीर में स्थान नहीं बना पाती है तो चित्त भी निर्मल और प्रसन्न रहता है। उक्त अवस्था से सभी तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं। शरीर की गंदगी साफ होने से इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। महामारी के इस दौर में यह जरूरी है। यहां प्रस्तुत है बाधी और धौती क्रिया के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
 
 
1. बाधी क्रिया : बाघ आदि जानवर अस्वस्थ होने पर इसी प्रकार की क्रिया से स्वास्थ्य लाभ लेते हैं, इसलिए इसका नाम बाधी क्रिया है।
 
विधि : खान-पान के दो घंटे बाद जब आधी पाचन क्रिया हुई होती है, तब दो अंगुली गले में डालकर वमन (उल्टी) किया जाता है जिससे अधपचा भोजन बाहर निकल आता है- यही बाधी क्रिया है।
 
ऐसा भी कर सकते हैं। पांच छ: ग्लास गुनगुना पानी पी लें। पानी में थोड़ा नमक डाला जा सकता है। इसके बाद दोनों हाथों को जांघ पर रखकर थोड़ा आगे की ओर झुक कर खड़े हो जाइए। उड्डीयान बंध लगाकर नौली क्रिया करें। पिया हुआ गुनगुना जल को वमन के माध्यम से पूरी तरह बाहर निकाले दें। आप दो अँगुलियों को गले में डालकर वमन क्रिया का आरंभ कर सकते हैं।
 
सावधानी : बाधी क्रिया को करने के लिए किसी योग्य योग चिकित्सक की सलाह लें। यदि किसी भी प्रकार का शारीरिक रोग हो तो यह क्रिया नहीं करना चाहिए। किसी भी प्रकार से किसी भी योगासन या क्रियाओं को जबरदस्ती नहीं करना चाहिए।
 
2. धौती क्रिया : यह कई तरह से होती है उसमें से वस्त्र धौती को करना थोड़ा कठिन है परंतु इससे संपूर्ण कफ बाहर निकल जाता है। 
 
विधि : पतले सूत के कपड़े को मुंह के द्वारा पेट में ले जाकर फिर धीरे-धीरे सावधानी पूर्वक बाहर निकालना ही वस्त्र धौती क्रिया है। 
 
सावधानी : इसे हठयोग के प्रवीण गुरु के प्रत्यक्ष निर्देशन में सीखना चाहिए।
 
इनका लाभ : इससे पेट की सभी प्रकार की गंदगी, कफ आदि उस अधपचे अन्न के साथ निकल जाती है। फलतः पेट संबंधी शिकायतें दूर होती हैं, साथ ही कफजन्य रोगों में काफी लाभ मिलता है। उक्त क्रिया से बुद्धि उज्जवल हो जाती है और शरीर में सदा स्फूर्ति बनी रहती है। इससे योगाभ्यास का शत-प्रतिशत लाभ प्राप्त होता है। इस क्रिया से पित्त की अधिकता समाप्त होती है। इसे आहारनाल साफ हो जाता है और पूरी तरह से कफ बाहर निकल जाता है। 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

नवीनतम

ये हमारी कहानी नहीं हैं, हमारी कहानी कुछ और है, जिसे हमें खोजना है

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता (फिर इंदौर) हमारा

Banyan Tree Benefits: शीघ्रपतन और वीर्य के पतलेपन से हैं परेशान? आयुर्वेद में छिपा है बरगद के फल और दूध का यह पारंपरिक नुस्खा

World Emoji Day 2026: विश्व इमोजी दिवस: कब और क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास और रोचक तथ्य

अगला लेख