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टीचर्स डे : बच्चों की नजर में, कैसे हो हमारे टीचर

नेहा रेड्डी
गुरुब्रर्ह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥ 
 
अध्यापक को ईश्वररूपी दूसरा दर्जा प्राप्त है। समाज के निर्माण में शिक्षक की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक आदर्श शिक्षक ही एक अच्छा नागरिक बनाने के साथ सर्वोत्तम आंतरिक विकास भी करता है। एक शिक्षक ही होता है, जो अपने क्लास में मौजूद संकोची बच्चे को आत्मविश्वासी बच्चे में तब्दील करता है।
 
एक बेहतर शिक्षक देश के बेहतर भविष्य का निर्माण करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है, वहीं बच्चों के मन में अपने शिक्षक को लेकर कई उम्मीदें रहती हैं। जैसे- टीचर ऐसा हो जो अपने स्टूडेंट के मन को समझें, यदि कोई बच्चा पढ़ाई में कमजोर है, तो उसे कमजोर साबित करके सिर्फ छोड़ न दें, बल्कि उसकी कमजोरी को समझकर उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
 
शिक्षक को चाहिए कि छात्रों को निःस्वार्थ भाव से पढ़ाएं। क्लास में मौजूद बच्चों की जरूरतों को समझें। एक शिक्षक में प्रेरणा देने का ऐसा हुनर हो कि पढ़ाई के प्रति उदासीन और पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थी भी पढ़ने-लिखने को प्रेरित हो जाएं। ऐसी कई बातें हैं जो बच्चों के मन में एक अपने आदर्श शिक्षक के लिए होती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए टीचर्स डे के मौके पर हमने बात की हैं कुछ विद्यार्थियों से और जानना चाहा कि बच्चों की नजर में, कैसे हो उनके टीचर्स...
 
1. स्टूडेंट श्रेष्ठा सिंह वेंकटेश्वर इंटरनेशनल स्कूल दिल्ली (1st class, Venkateshwar International School Delhi) कहती है कि टीचर ऐसा हो जो उन्हें समझें या understanding हो, साथ ही एक सबसे अच्छा दोस्त हो। श्रेष्ठा अपनी टीचर का जिक्र करते हुए कहती है कि दर्शप्रीत मैडम एक बहुत अच्छी टीचर है, क्योंकि वे हमारे साथ बिलकुल एक दोस्त की तरह रहती है, साथ ही हमें समझती भी है ताकि हम स्टूडेंट्स बिना किसी संकोच के अपनी बात अपने टीचर से कर सकें।
 
2. स्टूडेंट आग्नेय परमार (junior KG, Inodai Waldorf School Mumbai) आग्नेय कहते है, मेरी नीलिमा और सुनैना टीचर्स मेरी बहुत अच्छी दोस्त है। स्कूल में जाने पर गले लगाकर (Hug) मेरा वेलकम करती है। मुझे बहुत अच्छी-अच्छी बातें सिखाती है। मैं उनसे बहुत अच्छी Poem भी सिखता हूं। नीलिमा और सुनैना टीचर मेरी बहुत अच्छी दोस्त है।
 
3. स्टूडेंट आभास दुबे कक्षा 8वीं (St. Joseph's School Bhopal) आभास कहते है कि टीचर विनम्र (polite) हो। अपनी बात हमेशा सहजता के साथ समझाएं। एक दोस्त जैसे हमारे साथ रहे, ताकि हम बिना किसी संकोच के अपनी बात उनको बता सकें। हमें जो भी पढ़ाई में परेशानी आ रही है, उसे हम बिना कहें न रह जाएं। अपने डाउट्स को क्लियर करने के लिए जब हम अपने टीचर से पूछें तो, इस बात पर वे नाराज न हो बल्कि हमारी परेशानी को समझते हुए हमें समझें। एक टीचर का एक दोस्त बनना बहुत जरूरी है, ताकि हम बिना झिझक के अपनी परेशानी उनसे शेयर कर सकें।


 

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