dharma sangrah

फाल्गुन पूर्णिमा पर इस खीर से करें देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न, घर में बरसेगा धन

Webdunia
Makhane ki Kheer
 
फाल्गुन पूर्णिमा का दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए बहुत खास है, क्योंकि इसी दिन धन की देवी माता लक्ष्मी (Lakshmi Jayanti 2022) समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई थीं। देवी लक्ष्मी के प्रिय चीजों में मखाने (Phool Makhane) को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। अत: होलिका दहन वाले दिन देवी लक्ष्मी जी का पूजन करके उन्हें मखाने की खीर का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती है तथा घर में धन की बरकत होती है। आइए जानें एकदम सरल विधि- 
 
सामग्री : 1 लीटर दूध, 2 कटोरी मखाने, 4 चम्मच शकर, 2 छोटे चम्मच घी, बादाम-काजू की कतरन, किशमिश, 1/2 कटोरी बूरा (सूखा नारियल का), इलायची पावडर 1/2 चम्मच, दूध में भिगोएं हुए और 5-6 केसर के लच्छे।
 
विधि : सबसे पहले एक कड़ाई में घी गरम करके मखानों (Phool Makhane) को भून लें। तत्पश्चात भूनें मखानों को प्लेट में निकाल कर ठंडे होने दें, फिर उसको टुकड़े कर लें (आप चाहे तो मखाने को तोड़े बिना ही उपयोग कर सकते हैं)। अब दूध को उबलने दें। जब दूध उबल जाए तो उसमें मखाने डालकर पकाएं और शकर डालें और गाढ़ा होने तक पकाएं। 
 
अब उसमें काजू-बादाम की कतरन, नारियल का बूरा, किशमिश, इलायची और केसर को घोंट कर डालें। 1-2 उबाल आने पर आंच बंद कर दें। अब इस खीर से फाल्गुन पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी (Makhane Kheer Bhog) को भोग लगाएं। 

Lotus Seed
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

Guru Purnima Essay: हिन्दी निबंध: गुरु पूर्णिमा: गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का महापर्व

Shravan Month Essay: श्रावण मास पर रोचक हिन्दी निबंध

Happy Guru Purnima Messages: गुरु पूर्णिमा के 10 सबसे खास, भावात्मक और आकर्षक शुभकामना संदेश

आखिर कौन है यूपी में नकल संस्कृति का जनक?

बयानों की आग में झुलसता भारत: क्या शब्दों से बढ़ रही है देश की मुश्किलें?

अगला लेख