Hanuman Chalisa
✕

श्री कृष्ण तुम झूठे हो, तुम कदापि राम नहीं थे

Webdunia
रामेश्वर कुण्ड, एक समय श्री कृष्ण इसी कुण्ड के उत्तरी तट पर गोपियों के साथ वृक्षों की छाया में बैठकर श्रीराधिका के साथ हास–परिहास कर रहे थे।
 
 उस समय इनकी रूप माधुरी से आकृष्ट होकर आस पास के सारे बंदर पेड़ों से नीचे उतरकर उनके चरणों में प्रणाम कर किलकारियाँ मार कर नाचने–कूदने लगे।
 
बहुत से बंदर कुण्ड के दक्षिण तट के वृक्षों से लम्बी छलांग मारकर उनके चरणों के समीप पहुँचे. भगवान श्री कृष्ण उन बंदरों की वीरता की प्रशंसा करने लगे।
 
 गोपियाँ भी इस आश्चर्यजनक लीला को देखकर मुग्ध हो गई।वे भी भगवान श्री रामचन्द्र की अद्भुत लीलाओं का वर्णन करते हुए कहने लगीं कि श्री रामचन्द्र जी ने भी बंदरों की सहायता ली थी।
 
उस समय ललिता जी ने कहा– हमने सुना है कि महापराक्रमी हनुमान जी ने त्रेता युग में एक छलांग में समुद्र को पार कर लिया था।
 
परन्तु आज तो हम साक्षात रूप में बंदरों को इस सरोवर को एक छलांग में पार करते हुए देख रही हैं।
 
ऐसा सुनकर कृष्ण ने गर्व करते हुए कहा– जानती हो! मैं ही त्रेता युग में श्री राम था मैंने ही राम रूप में सारी लीलाएँ की थी।
 
 ललिता श्री रामचन्द्र की अद्भुत लीलाओं की प्रशंसा करती हुई बोलीं– तुम झूठे हो, तुम कदापि राम नहीं थे. 
 
तुम्हारे लिए कदापि वैसी वीरता सम्भव नहीं। श्री कृष्ण ने मुस्कराते हुए कहा–तुम्हें विश्वास नहीं हो रहा है, 
 
किन्तु मैंने ही राम रूप धारण कर जनकपुरी में शिव धनुष को तोड़कर सीता से विवाह किया था।
 
 पिता के आदेश से धनुष बाण धारण कर सीता और लक्ष्मण के साथ चित्रकूट और दण्डकारण्य में भ्रमण किया तथा वहाँ अत्याचारी दैत्यों का विनाश किया।
 
 फिर सीता के वियोग में वन–वन भटका. पुन: बन्दरों की सहायता से रावण सहित लंकापुरी का ध्वंसकर अयोध्या में लौटा।
 
मैं इस समय गोपालन के द्वारा वंशी धारण कर गोचारण करते हुए वन–वन में भ्रमण करता हुआ प्रियतमा श्री राधिका के साथ तुम गोपियों से विनोद कर रहा हूँ। 
 
पहले मेरे राम रूप में धनुष–बाणों से त्रिलोकी काँप उठती थी। किन्तु, अब मेरे मधुर वेणुनाद से सभी प्राणी उन्मत्त हो रहे हैं।
 
ललिता जी ने भी मुस्कराते हुए कहा–हम केवल कोरी बातों से ही विश्वास नहीं कर सकतीं,यदि श्री राम जैसा कुछ पराक्रम दिखा सको तो हम विश्वास कर सकती हैं।
 
 श्री रामचन्द्र जी सौ योजन समुद्र को भालू–कपियों के द्वारा बंधवा कर सारी सेना के साथ उस पार गये थे।
 
आप इन बंदरों के द्वारा इस छोटे से सरोवर पर पुल बँधवा दें तो हम विश्वास कर सकती हैं। 
 
ललिता की बात सुनकर श्री कृष्ण ने वेणू–ध्वनि के द्वारा क्षण-मात्र में सभी बंदरों को एकत्र कर लिया तथा उन्हें प्रस्तर शिलाओं के द्वारा उस सरोवर के ऊपर सेतु बाँधने के लिए आदेश दिया।
 
देखते ही देखते श्री कृष्ण के आदेश से हज़ारों बंदर बड़ी उत्सुकता के साथ दूर-दूर स्थानों से पत्थरों को लाकर सेतु निर्माण में लग गए।  
 
श्री कृष्ण ने अपने हाथों से उन बंदरों के द्वारा लाए हुए उन पत्थरों के द्वारा सेतु का निर्माण किया।
 
सेतु के प्रारम्भ में सरोवर की उत्तर दिशा में श्री कृष्ण ने अपने रामेश्वर महादेव की स्थापना भी की।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Diwali 2026: दिवाली की रात चुपचाप कर लें ये 5 गुप्त प्रयोग, साल भर होगी अपार धन की वर्षा

दिवाली के पहले धनतेरस पर बनाएं कुबेर-लक्ष्मी 'धन वर्षा पोटली': वर्षभर घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए? कहां-कहां जलाते हैं ये दीप? जानिए परंपरा का महत्व

Lakshmi vs Kamala Devi: माता लक्ष्मी और कमला माता में क्या है बड़ा अंतर? सच जानकर रह जाएंगे हैरान

Diwali Traditions 2026: बंगाल में काली, गुजरात में चोपड़ा तो दक्षिण भारत में क्या? जानें दिवाली पर राज्यों की अनोखी परंपराएं

सभी देखें

धर्म संसार

Diwali 2026 Chopra Puja: दिवाली की रात क्यों की जाती है 'चोपड़ा पूजा'? जानें इसके पीछे का खास रहस्य

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी की रात हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है? जानें इसके पीछे का बड़ा रहस्य

दीप जलें हर द्वार, तभी सजेगा समृद्धि का संसार

अयोध्या दीपोत्सव: आस्था, अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता का पर्वोत्कर्ष

Guru Ketu Yuti 2026: 5 दिसंबर तक सिंह राशि में गुरु-केतु की युति, इन 5 राशियों की खुलने वाली है लॉटरी

अगला लेख