Govardhan puja
✕

शिवजी कैलाश छोड़कर धरती पर यहां रहते हैं 4 माह, करते हैं यहीं से सृष्‍टि का संचालन

अनिरुद्ध जोशी
आषाढ़ी एकादशी के दिन से चार माह के लिए देव सो जाते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार चातुर्मास का प्रारंभ 20 जुलाई 2021 से हुआ और श्रावण मास का प्रारंभ 25 जुलाई 2021 रविवार से हुआ। श्रीहरि विष्णु चार माह के लिए योगनिंद्रा में सो जाते हैं तब उस दौरान भगवान शिव की सृष्टि का संचालन करते हैं।

 
1. चार माह के लिए भगवान विष्णु में सो जाते हैं और इस दौरान भगवान शिव के हाथों में सृष्टि का संचालन रहता है। इस अवधि में भगवान शिव पृथ्वीलोक पर निवास करते हैं और चार मास तक संसार की गतिविधियों का संचालन करते हैं। शिव का माह श्रावण माह ही चातुर्मास का प्रथम माह है।

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु सो जाते हैं और चतुर्दशी के दिन भगवान शिव सो जाएंगे। जब भगवान शिव सो जाते हैं तो उस उस दिन को शिव श्यानोत्सव के नाम से जाना जाता है। तब वह अपने दूसरे रूप रुद्रावतार से सृष्टि का संचालन करते हैं। भगवान रुद्र की स्तुति ऋग्वेद में बलवान में अधिक बलवान कहकर कहकर की गई है।
 
2. मान्यता है कि सृष्टि का कार्यभार देखने के लिए भगावन शिव माता पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय और नंदी आदि गणों के साथ अपनी ससुराल कनखल आकर रहते हैं। 
 
3. जन प्रचलित मान्यता के अनुसार वे हरिद्वार के पास कनखल में राजा दक्ष के मंदिर में आकर रहते हैं। 
 
4. कनखल हरिद्वार का सबसे प्राचीन स्थान है। इसका उल्लेख पुराणों में मिलता है। यह स्थान हरिद्वार से लगभग 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वर्तमान में कनखल हरिद्वार की उपनगरी के रूप में जाना जाता है।
 
5. कनखल का इतिहास महाभारत और भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कनखल ही वो जगह है जहां राजा दक्ष ने प्रसिद्ध यज्ञ किया था और सती ने अपने पिता द्वारा भगवान शिव का अपमान करने पर उस यज्ञ में खुद को दाह कर लिया था।
 
6. माता सती के अग्निदाह के बाद शिव के गण वीरभद्र ने राजा दक्ष की वध कर दिया था बाद में शिवजी ने उनके धड़ को वश्व के सिर से जोड़ दिया था। इसी घटना की याद में यहां पर दक्षेश्वर मदिर बना हुआ है।
 
7. आज कनखल हरिद्वार के सबसे ज्यादा घनी आबादी वाला क्षेत्र है। आज भी कनखल में बहुत सारे प्राचीन मंदिर बने हुए है। खरीदारी के हिसाब से हरिद्वार में कनखल का बाजार एक उपयुक्त स्थान माना जा सकता है।
 
8. कनखनल हरिद्वार की प्राचीन धरोहर है। यह राजा दक्ष की के राज्य की राजधानी थी। यहीं पर विश्व प्रसिद्ध गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय भी है।
 
9. हरिद्वार को पंचपुरी भी कहा जाता है। पंचपुरी में मायादेवी मंदिर के आसपास के 5 छोटे नगर सम्मिलित हैं। कनखल उनमें से ही एक है।
 
10. कनखलन में रुईया धर्मशाला, सती कुंड, हरिहर आश्रम, श्रीयंत्र मंदिर, दक्ष महादेव मंदिर, गंगा घाट और उनका मंदिर, शीतला माता मंदिर, दश महाविद्या मंदिर, ब्रम्हेश्वर महादेव मंदिर, हवेली सदृश अखाड़े और कनखल की संस्कृत पाठशालाएं।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Diwali 2026: दिवाली की रात चुपचाप कर लें ये 5 गुप्त प्रयोग, साल भर होगी अपार धन की वर्षा

दिवाली के पहले धनतेरस पर बनाएं कुबेर-लक्ष्मी 'धन वर्षा पोटली': वर्षभर घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए? कहां-कहां जलाते हैं ये दीप? जानिए परंपरा का महत्व

Lakshmi vs Kamala Devi: माता लक्ष्मी और कमला माता में क्या है बड़ा अंतर? सच जानकर रह जाएंगे हैरान

Diwali Traditions 2026: बंगाल में काली, गुजरात में चोपड़ा तो दक्षिण भारत में क्या? जानें दिवाली पर राज्यों की अनोखी परंपराएं

सभी देखें

धर्म संसार

Diwali 2026 Chopra Puja: दिवाली की रात क्यों की जाती है 'चोपड़ा पूजा'? जानें इसके पीछे का खास रहस्य

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी की रात हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है? जानें इसके पीछे का बड़ा रहस्य

दीप जलें हर द्वार, तभी सजेगा समृद्धि का संसार

अयोध्या दीपोत्सव: आस्था, अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता का पर्वोत्कर्ष

Guru Ketu Yuti 2026: 5 दिसंबर तक सिंह राशि में गुरु-केतु की युति, इन 5 राशियों की खुलने वाली है लॉटरी

अगला लेख