Publish Date: Wed, 19 Feb 2020 (13:55 IST)
Updated Date: Wed, 19 Feb 2020 (14:03 IST)
भारत के प्राचीन धर्म के केंद्र में है भगवान शिव। उनके शैव धर्म ही भारत का पहला और प्राचीन धर्म है। हजारों वर्ष पूर्व से ही शिव की पूजा का प्रचलन रहा है। वेदों में शिव को रुद्र कहा गया है। सिंधु घाटी सभ्याता में मिले अवशेषों से भी यह सिद्ध होता है। आओ जानते हैं कि शैव पंथ और उसके उप पंथ के अलावा शैव धर्म के प्रचारकों के नाम।
1. शैव पंथ और शैव परम्परा : शैव पंथ के कई उपपंथ हैं, जैसे शाक्त, गणपत्य, कौमारम, नाथ, दसनामी, तांत्रिक, आदिवासी शैव, सिद्ध, दिगंबर, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव परंपरा से हैं। चंद्रवंशी, सूर्यवंशी, अग्निवंशी और नागवंशी भी शिव की परंपरा से ही माने जाते हैं। भारत की असुर, रक्ष और आदिवासी जाति के आराध्य देव शिव ही हैं। शैव धर्म भारत के आदिवासियों का धर्म है।
2. शिव प्रचारक : भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। इसके अलावा वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, बाण, रावण, जय और विजय ने भी शैवपंथ का प्रचार किया। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय के बाद आदि शंकराचार्य, मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गुरुगोरखनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। नवनाथ की परंपरा ने आगे बढ़ाया।
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अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।....
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