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क्या रामायण और महाभारत काल में मंदिर होते थे?

अनिरुद्ध जोशी
अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या रामायण और महाभारत काल में भी मंदिर होते थे या कि वैदिक ऋषि अपने आश्रम में ध्यान करते थे और आम लोग घर में ही पूजा अर्चना करते थे? क्या ब्रह्मनिष्ठ लोग भी पूजा अर्चना करते थे?

रामायण काल में मंदिर होते थे, इसके प्रमाण हैं। राम का काल आज से 7129 वर्ष पूर्व था अर्थात 5114 ईस्वी पूर्व। राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की थी। इसका मतलब यह कि उनके काल से ही शिवलिंग की पूजा की परंपरा रही है। राम के काल में सीता द्वारा गौरी पूजा करना इस बात का सबूत है कि उस काल में देवी-देवताओं की पूजा का महत्व था और उनके घर से अलग पूजास्‍थल होते थे।
 
महाभारत में दो घटनाओं में कृष्ण के साथ रुक्मणि और अर्जुन के साथ सुभद्रा के भागने के समय दोनों ही नायिकाओं द्वारा देवी पूजा के लिए वन में स्थित गौरी माता (माता पार्वती) के मंदिर की चर्चा है। इसके अलावा युद्ध की शुरुआत के पूर्व भी कृष्ण पांडवों के साथ गौरी माता के स्थल पर जाकर उनसे विजयी होने की प्रार्थना करते हैं। 
 
देश में सबसे प्राचीन शक्तिपीठों और ज्योतिर्लिंगों को माना जाता है। इन सभी का समय-समय पर जीर्णोद्धार किया गया। प्राचीनकाल में यक्ष, नाग, शिव, दुर्गा, भैरव, इंद्र और विष्णु की पूजा और प्रार्थना का प्रचलन था। बौद्ध और जैन काल के उत्थान के दौर में मंदिरों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा और इस काल में राम एवं कृष्ण के मंदिर भी बनाए जाने लगे।

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