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प्रिय तुम मेरी कविताओं में आओगे

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prem geet
जब रात चांदनी रो रोकर
कोई गीत नया सुनाएगी
ओस की बूंद बनकर 
धरती पर वह छा जाएगी
 
उसकी उस मौन व्यथा को
तुम शब्दों का रूप दे जाओगे
 
प्रिय तुम मेरी कविताओ में आओगे
जब आंख के आंसू बहकर के
 
कपोलों पर ठहरे होंगे
जब काजल के शब्दों ने 
 
कुछ गीत नए लिखे होंगे
तब इन गीतों के शब्दों में
 
तुम ध्वनि बनकर बस जाओगे
 
प्रिय तुम मेरी कविताओं में आओगे
 
जब पीड़ा अपने स्वर को
 
कैनवस पर मुखरित करेगी
गजल और गीत बनकर वो
 
मन मन्दिर को हर्षित करेगी
तब तुम श्याम की बांसुरी बन करके
 
तन-मन को महकाओगे
प्रिय तुम मेरी कविताओं में आओगे। 
                                

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