Festival Posters

हिन्दी कविता : गणतंत्र दिवस फिर आया है

Webdunia
आज नई सज-धज से
गणतंत्र दिवस फिर आया है।
नव परिधान बसंती रंग का
माता ने पहनाया है।
 
भीड़ बढ़ी स्वागत करने को
बादल झड़ी लगाते हैं।
रंग-बिरंगे फूलों में
ऋतुराज खड़े मुस्काते हैं।
 
धरती मां ने धानी साड़ी
पहन श्रृंगार सजाया है।
गणतंत्र दिवस फिर आया है।
 
भारत की इस अखंडता को
तिलभर आंच न आने पाए।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
मिलजुल इसकी शान बढ़ाएं।
 
युवा वर्ग सक्षम हाथों से
आगे इसको सदा बढ़ाएं।
इसकी रक्षा में वीरों ने
अपना रक्त बहाया है।
गणतंत्र दिवस फिर आया है। 

ALSO READ: गणतंत्र दिवस पर दोहे

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

India-US ट्रेड डील पर सियासी संग्राम, कांग्रेस का सवाल- 'आत्मनिर्भर भारत या अमेरिका-निर्भर भारत?'

मणिशंकर अय्यर ने बढ़ाई कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, 'विस्फोटक' बयानों से पार्टी शर्मसार

Supreme Court कोई प्लेग्राउंड नहीं, असम CM हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ याचिका पर CJI की सख्त टिप्पणी

एमपी के आईएएस असफर ने की तीसरी शादी, दो पूर्व पत्‍नियां हैं कलेक्‍टर, तीसरी भी आईएएस, ये खबर मचा रही धमाल

रेप के आरोपों से घिरे महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी पर मध्यप्रदेश में कसेगा शिकंजा!, विदेश भगाने की भी अटकलें

सभी देखें

नवीनतम

Mohan Bhagwat : हिन्दू 3 बच्चे पैदा करें, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान, घर वापसी का काम तेज होना चाहिए

मध्यप्रदेश का आर्थ‍िक सर्वेक्षण 2025-26: सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 11.14 प्रतिशत वृद्धि

CM योगी की अखिलेश को सलाह, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए आगे आएं

प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को किया मजबूत तो बीमारू से बना उत्तम प्रदेश बना यूपी

बुधवार से शुरू होंगी यूपी बोर्ड परीक्षाएं, 53 लाख से अधिक परीक्षार्थी होंगे शामिल

अगला लेख