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आस क्रिया योग के बाबा हरिओम दास का एस्ट्रल ट्रैवल दावा: क्या सच में होती है दूसरे लोक की यात्रा? जानिए क्या है सच्चाई

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Aas Kriya Yog: योगी हरिओम दास महाराज (बाबा हरिओम दास) सोशल मीडिया, पॉडकास्ट और धार्मिक मंचों पर सक्रिय एक बहुचर्चित आध्यात्मिक गुरु और योग साधक हैं। वे मुख्य रूप से 'आस क्रिया योग' संस्थान के संस्थापक/प्रवर्तक के रूप में जाने जाते हैं। हाल ही में एस्ट्रल ट्रैवल के उनके दावों को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कई लोगों का मानना है कि बाबा इस संबंध में झूठ बोल रहे हैं और कई लोग उनके दावों को सच मान रहे हैं। चलिए जानते हैं आखिर क्या है मामला। 
 

1. 'आस क्रिया योग' के संस्थापक

बाबा हरिओम दास 'आस क्रिया योग' नामक ध्यान और साधना पद्धति सिखाते हैं। उनका दावा है कि इस क्रिया के माध्यम से व्यक्ति अपने श्वास, मन और ऊर्जा तंत्र पर नियंत्रण पा सकता है तथा तनावमुक्त जीवन जी सकता है।
 

2. सूक्ष्म शरीर यात्रा (Astral Travel) और लोक-यात्रा के दावे

वे सोशल मीडिया और विभिन्न इंटरव्यू (पॉडकास्ट) में अपने कुछ अति-अलौकिक और चौंकाने वाले दावों के कारण चर्चा में आए:
सूक्ष्म शरीर से यात्रा (Astral Projection): उनका दावा है कि वे अपनी आत्मा (सूक्ष्म शरीर) को भौतिक शरीर से अलग करके देवलोक, पाताल लोक और अन्य लोकों (ग्रहों) की यात्रा करते हैं।
देवी-देवताओं से मिलने का दावा: वे इंटरव्यू में यह भी दावा करते हैं कि उन्होंने अपनी सूक्ष्म यात्राओं के दौरान भगवान शिव, श्रीराम, मां दुर्गा और ब्रह्मा जी जैसी दिव्य सत्ताओं के दर्शन किए हैं।
 

3. मीडिया में चर्चा और विवाद

सोशल मीडिया वायरल: यूट्यूब पर कई पॉडकास्ट पर उनके साक्षात्कार लाखों बार देखे गए हैं, जिससे वे युवाओं के बीच कोतुहल का विषय बने हुए हैं।
न्यूज चैनलों पर बहस/विवाद: उनके अलौकिक दावों को लेकर मुख्यधारा के समाचार चैनलों पर काफी वाद-विवाद भी हुआ। अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ताओं और मीडिया विश्लेषकों ने उनके दावों पर सवाल उठाए और इन्हें फैंटसी या अतिशयोक्ति करार दिया, जबकि उनके अनुयायी इसे उच्च योग साधना का परिणाम मानते हैं। 
 

4. पुस्तकें और आध्यात्मिक साहित्य

उन्होंने आध्यात्मिक साधनाओं और अपनी साधना यात्रा पर आधारित पुस्तकें (जैसे 'एक योगी की आत्मा की यात्रा') भी लिखी हैं, जिनमें सूक्ष्म शरीरों, चक्रों और ब्रह्मांडीय चेतना के बारे में वर्णन किया गया है।
समर्थक और साधक: जो लोग आध्यात्मिक अनुभवों, ध्यान और योग में रुचि रखते हैं, वे उन्हें एक सिद्ध योगी और मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं।
तार्किक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वैज्ञानिक और तार्किक विचार रखने वाले लोग उनके देवलोक जाने और भौतिक शरीर से बाहर निकलकर ग्रहों की यात्रा करने जैसे दावों को वैज्ञानिक प्रमाणों के अभाव में मनगढ़ंत कहानी या कल्पना मानते हैं।
 

5. क्या है आस क्रिया योग?

अर्थ और मूल उद्देश्य: 'आस' (AAS) का अर्थ आत्म-साक्षात्कार और परमात्मा से जुड़ने की आस (आशा) है। इसका मुख्य उद्देश्य मन को शांत करके मानसिक-आध्यात्मिक संतुलन बनाना और तनाव मुक्ति दिलाना है।
श्वास और ध्यान का अभ्यास: यह साधना विशेष लय में श्वास लेने-छोड़ने, रीढ़ की हड्डी व चक्रों पर ध्यान केंद्रित करने और विचारों के प्रति जागरूक (विचारशून्य) होने पर आधारित है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन बढ़ती है और मन शांत होता है।
पारंपरिक क्रिया योग से अंतर: महाअवतार बाबाजी, लहिड़ी महाशय और परमहंस योगानंद की पारंपरिक क्रिया योग विद्या का यह एक सरल और आधुनिक रूप है, जिसे आम लोग दैनिक जीवन में आसानी से अपना सकते हैं।
व्यावहारिक लाभ: जो लोग इसका नियमित अभ्यास करते हैं, वे बताते हैं कि इससे मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है। अनिद्रा और तनाव में राहत मिलती है। शरीर में ऊर्जा और ताजगी महसूस होती है।
 

6. प्राचीन भारत में सूक्ष्म शरीर यात्रा और परकाया प्रवेश के किस्से?

भारत के प्राचीन ग्रंथों, योग-शास्त्रों और आध्यात्मिक परंपराओं में सूक्ष्म शरीर से यात्रा करने और परकाया प्रवेश (दूसरे के शरीर में प्रवेश करना) की सिद्धियों का विस्तृत वर्णन मिलता है:
पातंजलि योग दर्शन: इस ग्रंथ में योग बल से सूक्ष्म शरीर द्वारा आकाश गमन, एक साथ अनेक शरीर धारण करने और परकाया प्रवेश जैसी कई अलौकिक योग विभूतियों का उल्लेख है।
गुरु मत्स्येंद्रनाथ (मछंदरनाथ): नाथ संप्रदाय के आदि गुरु को परकाया प्रवेश की सिद्धि प्राप्त थी। उन्होंने अपने शिष्य गोरखनाथ को अपने भौतिक शरीर की सुरक्षा सौंपकर एक मृत राजा के शरीर में प्रवेश किया था।
आदि शंकराचार्य व नाथ संप्रदाय: आदि शंकराचार्य और नाथ परंपरा के कई साधक इस विद्या में पूरी तरह पारंगत थे।
विदुषी सुलभा (महाभारत - शांति पर्व): विदुषी सुलभा ने अपने योगबल से राजा जनक के शरीर में सूक्ष्म रूप से प्रवेश करके विद्वानों के साथ शास्त्रार्थ किया था।
ऋषि शिष्य विपुल (महाभारत - अनुशासन पर्व): ऋषि देवशर्मा के सिद्ध शिष्य 'विपुल' ने अपनी योग शक्ति से सूक्ष्म शरीर द्वारा गुरु-पत्नी के शरीर में उपस्थित होकर देवराज इंद्र के कुचक्र से उनकी रक्षा की थी।
 

7. क्या सूक्ष्म शरीर यात्रा की जा सकती है?

ध्यान: शास्त्रों के अनुसार इसके लिए नियमित रूप से गहरा ध्यान करने से जब चित्त शांत हो जाता है तो व्यक्ति की चेतना सूक्ष्म शरीर में स्थित हो जाती है। फिर भी कभी भी ध्यान की अवस्था में अपने शरीर से बाहर निकलकर यात्रा कर सकता है।
योग निद्रा: यह भी योग की एक क्रिया है। शवासन की स्थिति में सोकर श्वासों पर ध्यान देते हुए जातक योग निद्रा का अभ्यास करके भी उस अवस्था को प्राप्त कर सकता है जिसमें शरीर से बाहर निकला जा सके।
प्राण विद्या: प्राण विद्या के अंतर्गत स्पर्श चिकित्सा, सम्मोहन, टेलीपैथी, त्रिकालदर्शिता (भूत-भविष्य देखना), दूर श्रवण/दृश्य, पूर्वजन्म का ज्ञान और सूक्ष्म शरीर से अन्य लोकों की यात्रा जैसी अनेक विद्याएं शामिल हैं।
इस विद्या के बल पर साधक भारी-भरकम ट्रक को शरीर पर चलवाना, उड़ते प्लेन को भुजाओं से रोकना, पानी के भीतर बिना सांस लिए रहना, खुद को एक सप्ताह तक जमीन में गाड़ना या ताले में बंद होकर पल भर में बाहर निकलना जैसे असंभव कार्य कर दिखाते हैं। इसके माध्यम से किसी व्यक्ति को पूरी तरह स्वस्थ करने, यहां तक कि जीवनदान देने जैसी शक्तियां प्राप्त होती हैं। इसी प्राण विद्या के बल पर ही व्यक्ति सूक्ष्म शरीर में स्थिति होकर दूसरे लोकों की यात्रा कर सकता है। 
 

8. क्या कहता है विज्ञान?

योग का दायरा: मेडिकल साइंस के अनुसार योग और प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य व इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाते हैं, लेकिन ये किसी गंभीर बीमारी का पूर्ण इलाज या विकल्प नहीं हैं।
सूक्ष्म शरीर और दिव्य रोशनी का सच: एडिनबर्ग और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार 'सूक्ष्म शरीर यात्रा' या मौत के निकट चमकती रोशनी दिखने जैसी घटनाएं अध्यात्म या अलौकिक नहीं, बल्कि इंसान के दिमाग का बहकावा हैं।
वैज्ञानिक कारण: मुख्य शोधकर्ता डॉ. कैरोलिन वाट के अनुसार, मौत के समय आंखों पर पड़ने वाले प्रकाश को चित्रों में बदलने वाली कोशिकाएं मृत होने लगती हैं। यह कोई आध्यात्मिक यात्रा नहीं, बल्कि मस्तिष्क में होने वाले बदलावों के कारण होने वाला एक शारीरिक अहसास है।

अस्वीकरण (Disclaimer) :

चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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