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Vijaya Parvati Vrat 2026: विजया पार्वती व्रत कब से होगा प्रारंभ, क्या है इस व्रत का महत्व

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Devotees worshipping Lord Shiva and Goddess Parvati on the occasion of the Vijaya Parvati Vrat, as shown in the picture
Vijaya Parvati Vrat Date 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित अनेक व्रतों का विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक है विजया पार्वती व्रत, जिसे सुहाग, सुखी दांपत्य जीवन और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित और अविवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप और व्रत किए थे। उसी स्मृति में विजया पार्वती व्रत का पालन किया जाता है।ALSO READ: Nag Panchami 2026: कब है नाग पंचमी? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और महत्व
 
यह व्रत लगातार पांच दिनों तक किया जाता है और इसका समापन उद्यापन के साथ होता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौभाग्य, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
 

आइए जानते हैं वर्ष 2026 में विजया पार्वती व्रत कब से शुरू हो रहा है, इसकी सही तिथियां, पूजा का शुभ मुहूर्त और इस व्रत का धार्मिक महत्व।

 

विजया पार्वती व्रत 2026 कब से प्रारंभ हो रहा है?

 
हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से विजया पार्वती व्रत प्रारंभ होता है और लगातार 5 दिनों तक चलता है। वर्ष 2026 में यह व्रत तिथि और पंचांग के अनुसार रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है
 
त्रयोदशी व्रत प्रारंभ होने की तिथि: 27 जुलाई 2026, सोमवार
पारण तथा व्रत समाप्ति की तिथि: 1 अगस्त 2026, शनिवार
 
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 26 जुलाई 2026 को 01:57 पी एम से, 
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 27 जुलाई 2026 को 04:14 पी एम पर।
 
जया-पार्वती प्रदोष पूजा मुहूर्त  07:15 पी एम से 09:20 पी एम तक
कुल अवधि- 02 घण्टे 05 मिनट्स
 

विजया पार्वती व्रत 2026 पूजा मुहूर्त

27 जुलाई को विजया पार्वती व्रत की पहली पूजा प्रदोष काल के लिए शुभ मुहूर्त शाम 07:15 बजे से रात 09:20 बजे तक रहेगा। इस दौरान शिव-पार्वती की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
 

व्रत का पौराणिक महत्व

विजया पार्वती व्रत को गणगौर, हरतालिका तीज और मंगला गौरी व्रत के समान ही अत्यंत फलदायी और पवित्र माना जाता है।
 
1. सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए यह 5 दिवसीय कठिन व्रत रखती हैं।
 
2. कुंवारी कन्याएं यदि इस व्रत को पूरे नियम और निष्ठा के साथ करती हैं, तो उन्हें योग्य, संस्कारी और मनचाहे वर या मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है।
 
3. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से निसंतान दंपत्तियों को गुणवान और तेजस्वी संतान का सुख प्राप्त होता है।
 
4. माना जाता है कि विजया पार्वती व्रत की कथा सुनने और शिव-पार्वती का ध्यान करने से घर-परिवार के सारे संकट दूर होते हैं और समृद्धि का आगमन होता है।
 

विजया पार्वती व्रत के नियम

ज्वारे बोना/ जया पार्वती जवा: व्रत के पहले दिन त्रयोदशी को किसी मिट्टी के पात्र में गेहूं या जौ बोए जाते हैं। 5 दिनों तक इनकी प्रतिदिन पूजा की जाती है और अंतिम दिन इन्हें पवित्र नदी या जल में प्रवाहित किया जाता है।
 
नमक का त्याग: विजया पार्वती पर्व के इस 5 दिवसीय व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है। इसे 'अलोना व्रत' भी कहते हैं। व्रती केवल दूध, फल, दही और फलाहार ग्रहण करते हैं।
 
रात्रि जागरण: व्रत के 5वें दिन रात भर जागरण करके मां पार्वती और भगवान भोलेनाथ के भजन-कीर्तन किए जाते हैं।
 
विजया पार्वती व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, साधना और भक्ति का प्रतीक है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की कामना करते हैं, तो विधि-विधान के साथ इस व्रत का पालन अवश्य करें।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Asha Dashami Vrat 2026: आशा दशमी का महत्व और कथा

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