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Surup Dwadashi 2025: पौष मास में सुरूप द्वादशी के दिन क्यों रखते हैं व्रत, क्या है इसका महत्व

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WD Feature Desk

, मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 (09:37 IST)
Poush Month Vrat : पौष मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को सुरूप द्वादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी तिथि के अगले दिन आती है, जिसका विशेष महत्व है। पौष मास में बहुत सारे महत्वपूर्ण व्रत और पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें 'सुरूप द्वादशी' का व्रत एक प्रमुख अवसर है।  'सुरूप' का शाब्दिक अर्थ है सुंदर रूप या अच्छा रूप।

इस व्रत को रखने के पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक कारण हैं, जो भक्तों को भगवान विष्णु की कृपा से सुंदरता, सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। साथ ही सुरूप द्वादशी का विशेष संबंध भगवान श्री कृष्ण से भी है, क्योंकि इस दिन भक्त भगवान के सुंदर रूप का ध्यान करते हैं और उनके रूप-संस्कार की पूजा करते हैं। इस वर्ष यह व्रत 16 दिसंबर 2025, दिन मंगलवार को पड़ रहा है।ALSO READ: Paus Amavasya 2025 पौष मास की अमावस्या का महत्व और व्रत के 5 फायदे

इस व्रत को रखने का महत्व और इसके प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं:
 
महत्व: सुरूप द्वादशी का व्रत मुख्य रूप से भगवान विष्णु और उनके विभिन्न सुंदर रूपों की उपासना के लिए किया जाता है। चूंकि द्वादशी तिथि विष्णु जी को समर्पित है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा से विशेष लाभ प्राप्त होता है। यह तिथि अक्सर सफला एकादशी के अगले दिन आती है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी के दिन ही किया जाता है। इसलिए, यह तिथि एकादशी व्रत के पूर्ण फल की प्राप्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है। 
 
यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है जो उत्तम रूप, आकर्षण और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं। यह माना जाता है कि विष्णु जी की कृपा से साधक का मन और शरीर दोनों ही सुंदर और स्वस्थ बनते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है। पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी और चने की दाल का भोग अर्पित किया जाता है। ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना इस व्रत के फल को कई गुना बढ़ा देता है।ALSO READ: Paush month: पौष मास का महत्व और पौराणिक कथा
 
क्यों रखते हैं सुरूप द्वादशी व्रत, जानें प्रमुख फायदे:
 
* उत्तम स्वास्थ्य और सुंदरता: इस व्रत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह शरीर को निरोगी बनाता है और मुखमंडल पर तेज लाता है, जिससे व्यक्ति के रूप/सुरूप में वृद्धि होती है।
 
* मानसिक शांति और एकाग्रता: भगवान विष्णु के ध्यान से मन की चंचलता दूर होती है, जिससे मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मकता आती है।
 
* भोग और मोक्ष: शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक यह व्रत रखता है, उसे जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और अंत में वह मोक्ष का अधिकारी बनता है।
 
* पापों से मुक्ति: पौष मास में पड़ने के कारण यह व्रत शीतलता और आध्यात्मिकता से जुड़ा होता है। यह पिछले पापों और दोषों को दूर करने में सहायक माना जाता है।
 
* विवाह और संतान सुख: कुछ क्षेत्रों में, यह व्रत योग्य और सुंदर जीवनसाथी की प्राप्ति तथा उत्तम संतान के लिए भी रखा जाता है।
 
माना जाता है कि इस दिन श्री कृष्ण ने अपनी कृपा से भक्तों के दुखों को दूर किया था, इसलिए इसे कृष्ण पूजा के रूप में भी मनाया जाता है।ALSO READ: Paush Month Festivals: पौष महीना 2025-2026: प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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