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अनंत चतुर्दशी 2026: कैसे रखें व्रत? जानिए अनंत व्रत के 5 जरूरी नियम और खास बातें

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Anant Chaturdashi Vrat 2026: अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण एवं पवित्र पर्वों में से एक है। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के 'अनंत' (असीम/अंतहीन) रूप की पूजा की जाती है, साथ ही 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन यानी गणपति विसर्जन भी इसी दिन होता है।

अनंत चतुर्दशी से जुड़ी 5 खास बातें

भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की साधना: इस दिन शेषनाग की शय्या पर विराजमान भगवान श्रीहरि विष्णु के 'अनंत' स्वरूप की आराधना की जाती है, जिससे जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं।
14 गांठों वाला रक्षासूत्र (अनंत सूत्र): पूजन के उपरांत 14 गांठों वाला अनंत धागा धारण किया जाता है, जो भक्तों को आर्थिक, शारीरिक और मानसिक संकटों से सुरक्षा प्रदान करता है।
चौदह लोकों का प्रतीक: धागे में बांधी गई 14 गांठें भगवान विष्णु द्वारा निर्मित 14 लोकों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
पांडवों की विपत्ति हरने वाला व्रत: महाभारत काल में श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने अपना खोया हुआ राज्य और वैभव वापस पाने के लिए यह व्रत रखा था।
गणेश विसर्जन का महापर्व: इसी पावन तिथि पर 10 दिनों से विराजमान प्रथम पूज्य गणपति बाप्पा का जल में विसर्जन कर उन्हें अगले वर्ष आने के निमंत्रण के साथ विदा किया जाता है।

अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि एवं नियम

संकल्प व स्थापना: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पवित्र स्थान पर लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर कलश स्थापित करें और उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
अनंत सूत्र निर्माण: रेशम या सूती धागे को हल्दी व कुमकुम से रंगकर उसमें 14 गांठें लगाएं। यह धागा 14 लोकों (भूः, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्यम्, अतल, वितल, सुतल, रसातल, तलातल, महातल, पाताल) का प्रतीक माना जाता है।
पूजन एवं कथा: तैयार किए गए अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के चरणों में रखें। इसके बाद रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और गंध से विधि-विधान से पूजन करें। तत्पश्चात अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण या वाचन करें।
धारण करने का नियम: पूजा पूरी होने के बाद मंत्रोच्चारण करते हुए इस पवित्र धागे को धारण करें। पुरुष इसे अपने दाहिने हाथ पर और महिलाएं इसे अपने बाएं हाथ की कलाई पर बांधती हैं।
भोग व प्रसाद: भगवान को पंचामृत, ताजे फल और मुख्य रूप से शुद्ध घी में बने पुए या खीर का भोग लगाया जाता है। पूजन के बाद परिवार में प्रसाद वितरित करें।
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अनंत चतुर्दशी की पौराणिक कथा

महाभारत की कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हारकर जंगलों में भटक रहे थे, तब अत्यंत दुख और संकट की घड़ी में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने की सलाह दी थी।
युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ विधि-विधान से यह व्रत किया और अनंत सूत्र धारण किया। इस व्रत के दिव्य प्रभाव और भगवान श्रीहरि की अनुकंपा से पांडवों के सभी कष्ट दूर हुए और अंततः उन्हें अपना खोया हुआ राज्य, धन और मान-सम्मान पुनः प्राप्त हुआ।
 

धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

'अनंत' का अर्थ है- जिसका न कोई आदि है और न अंत। इस दिन भगवान विष्णु की शेषनाग पर विराजमान अनंत रूप में पूजा की जाती है, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के पालनहार हैं। यह पर्व मनुष्य को यह आध्यात्मिक सीख देता है कि संसार में धन, संपत्ति और सांसारिक सुख अस्थाई हो सकते हैं, लेकिन परमेश्वर की भक्ति और सत्कर्म ही 'अनंत' और स्थाई हैं। जो भी भक्त इस दिन निष्काम भाव से व्रत व पूजन करता है, उसे मृत्यु के पश्चात विष्णुलोक में स्थान प्राप्त होता है।

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