dharma sangrah

प्रवासी कविता : बेटियां

पुष्पा परजिया
बुधवार, 17 अप्रैल 2024 (14:52 IST)
आसमां को छू जाना है 
उन हवाओं में खो जाना है 
वो भीनी-सी सुगंध संग बहती है, सुगंधित हवाएं उस बचपन के अनोखे आलम में ख़ुद को भिगोना है 
साथ ले चल ऐ मन तरंगों में झनझनाती ये उम्मीदों की दोपहरी जहां जाकर के ख़ुद को भुलाना है 
देखे थे ख़्वाबों में जो मंजर ख़ुशी के 
उस ख़ुशी को आज जाकर गले से लगाना है 
अब ना याद कर आहत दिल के आंसू 
क्योंकि अब तो दिया, ज़िंदगी ने हंसने का बहाना है 
नन्ही-सी प्यारी-सी परी मिली है मुझको, जिसे गले से लगाके खूब बतियाना है,
तू ख़ुशियां ही पाना माता रानी से ये ही दुआ मांगू मैं 
तुझे देखूं तो मेरी ख़ुशी का ना कोई ठिकाना है 
ना जाने क्यूं बेटी को लोग समझते है भार? बेटी तो सिर्फ़ और सिर्फ़ ख़ुशियों का ख़ज़ाना है,
ना करना हत्या, इन्हें दूर करके ना करना पाप, कन्या के भ्रूण हत्या का, ना कहना कभी पराया धन उसे 
अरे बेटी ही तो एक है जिनसे ये जमाना है 
बिन बेटी के संसार ही रुक जाएगा फिर बेटों पर आपको क्यों इतना इतराना है?

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

इंदौर में आयोजित होगा राज्य स्तरीय- लक्ष्य मंथन योगासन प्रतियोगिता

दिलों को जोड़ने की एक मुहिम: जानिए राजीव गांधी की जयंती और 'सद्भावना दिवस' का कनेक्शन

आसमान से बरसेगा सेहत या संकट? जानिए बारिश का पानी पीने का सच!

Ebola Virus: क्या है इबोला वायरस? जानिए इसके लक्षण, संक्रमण और बचाव के आसान उपाय

बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

अगला लेख