Publish Date: Mon, 10 Feb 2020 (14:38 IST)
Updated Date: Mon, 10 Feb 2020 (14:44 IST)
नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में चल रहे धरना प्रदर्शन के दौरान 4 माह की एक नवजात की मौत के मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सोमवार को केंद्र एवं दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया।
उधर, प्रदर्शनकारियों को शाहीन बाग से हटाने के मामले में भी दो अन्य याचिकाओं पर दूसरी पीठ ने केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किए हैं। एक हफ्ते में जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की खंडपीठ ने राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित लड़की जेन सदावरते के पत्र का स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने धरना प्रदर्शन में 4 माह की नवजात बच्ची की जान जाने पर तल्ख टिप्पणी की।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि क्या 4 माह की बच्ची प्रदर्शन में भाग लेने गई थी?
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि चार महीने के बच्चे की मौत हुई है।
सुनवाई के दौरान ही शाहीन बाग की 3 महिलाओं ने भी अपना पक्ष रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों को स्कूल में पाकिस्तानी कहा जाता है। इस पर न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा ‘हम इस समय एनआरसी, एनपीए, सीएए को लेकर या किसी बच्चे को पाकिस्तानी कहने को लेकर सुनवाई नहीं कर रहे हैं’।
महिलाओं की ओर से अनावश्यक जिरह किए जाने के बाद न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा, ‘हमें मदरहुड के लिए सम्मान है। हम किसी की आवाज नहीं दबा रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में बेवजह की बहस नहीं करेंगे’।
उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के समक्ष यह विषय नहीं है कि किसी बच्चे को स्कूल में पाकिस्तानी कहा गया या कुछ और। नवजात बच्ची की मौत का मामला गंभीर है और वह केवल इसी मसले पर ध्यान केंद्रित रखेगी।
इसके बाद न्यायालय ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करके चार हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है।