Publish Date: Fri, 26 Oct 2018 (21:41 IST)
Updated Date: Fri, 26 Oct 2018 (22:19 IST)
प्रयागराज। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने शुक्रवार को कहा कि हिन्दू समाज राम मंदिर के लिए उच्चतम न्यायालय के फैसले का अनंतकाल तक इंतजार नहीं कर सकता, इसलिए विहिप ने गत 5 अक्टूबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से राजधानी दिल्ली में मिलकर उनसे सरकार से इस संबंध में कानून लाने के लिए कहने का अनुरोध किया।
यहां विहिप कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 5 अक्टूबर को संतों की उच्चाधिकार समिति की बैठक हुई है जिसमें यह निर्णय हुआ कि उच्चतम न्यायालय के फैसले का अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं किया जा सकता तथा बैठक में संतों ने याद कराया कि 1989 में पालमपुर में भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी ने पहली बार राम जन्मभूमि का प्रस्ताव पारित किया था। उसमें पार्टी ने अंतिम पैराग्राफ में यह कहा था कि यह मंदिर या तो परस्पर सहमति से बनेगा या फिर कानून से बनेगा।
आलोक कुमार ने कहा कि हम सभी संतों ने राष्ट्रपति से कहा कि राम मंदिर के मामले को अदालतों में 68 साल हो गए, उच्चतम न्यायालय में 8 साल हो गए। हमने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वे सरकार से कानून लाने को कहें। हमने जनता के बीच 3 चरणों में जाना तय किया है। पहले चरण में सभी राज्यों की धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी मिलकर राज्यपाल के पास जाएंगे और प्रदेश की जनता की ओर से कहेंगे कि मंदिर बनना चाहिए। राज्यपाल इस बात को केंद्र तक पहुंचाएं।
उन्होंने बताया कि दूसरा चरण 15 नवंबर से शुरू होगा और यह महत्वपूर्ण चरण होगा जिसमें भारत के प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में एक बड़ी जनसभा होगी जिसके बाद वहां के लोगों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल वहां के सांसद के पास जाएगा और मांग करेगा कि वे अपने इसी कार्यकाल में संसद में राम मंदिर के लिए कानून बनाने का समर्थन करें।
उन्होंने कहा कि तीसरा चरण 18 दिसंबर को गीता जयंती के दिन से शुरू होगा जिसमें इस प्रकृति और ब्रह्मांड की सभी शक्तियों से मंदिर निर्माण के लिए आह्वान किया जाएगा। देश के प्रत्येक मंदिर, मठ, गुरुद्वारे में वहां की पद्धति के अनुसार अनुष्ठान किए जाएंगे तथा हमें उम्मीद है कि 31 जनवरी को प्रयाग में होने वाली धर्म संसद से पहले ही मंदिर निर्माण के रास्ते में आ रहीं बाधाएं दूर हो जाएंगी और मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। अगर कोई अड़चन बची तो हम धर्म संसद में संतों से आगे का रास्ता पूछेंगे।
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Publish Date: Fri, 26 Oct 2018 (21:41 IST)
Updated Date: Fri, 26 Oct 2018 (22:19 IST)