Hanuman Chalisa

‘कॉम्पीटीशन’ की दौड़ में कोचिंग की ‘होड़’ कब तक?

ऋतुपर्ण दवे
काश दौलत से सपने भी खरीद पाते? लेकिन यह न सच है और न कभी होगा। फिर भी एक अंधी दौड़ में अनजान सफर पर चल पड़ा हर आम और खास इसी दौलत के बलबूते अपनी संतान को सपनों के उस तिलिस्म तक पहुंचा ही देता है जो पैसों नहीं उसकी प्रतिभा और क्षमता पर निर्भर होती है।

दरअसल अभिभावक को जो तैयारी बचपन से करनी चाहिए वो संतान के वयःसंधि में पहुंचने पर करता है। उसे लगता है कि दौलत ही वह सहारा बचा है जो उसकी संतान को सुखद भविष्य दे सकता है। बस यही सपना नौनिहालों की ब्रॉन्डिंग के लिए दो-ढ़ाई दशक से कथित ठेकेदार बने आलीशान कोचिंग संस्थान और उनके शानदार शो रूम की फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती रिसेप्शनिस्ट और खुशबूदार एयरकंडीशन्ड कमरे में बैठा संचालक भी दिखाते हैं।

लोग खुद-ब-खुद ऐसे सब्जबाग की गिरफ्त में आ जाते हैं। अभिभावक भ्रमित हो वही मान बैठता है जो कॉर्पोरेटर बना नयी विधा का उद्योगपति कहता है। सब जानते हैं कि कोचिंग संस्थान कोई रेडीमेड सांचे नहीं जहां पहुंचते ही बच्चे ढ़ल जाएं। एसोचेम के एक सर्वे के अनुसार मेट्रोपोलिटन शहरों में प्राइमरी स्कूल तक के 87 प्रतिशत और हाईस्कूल के 95 प्रतिशत बच्चे स्कूल के अलावा कोचिंग का सहारा लेते हैं। जबकि यहाँ कॉम्पीटीशन जैसी कोई बात ही नहीं।

कोचिंग ले रहे नौनिहालों का स्याह लेकिन कड़वा सच भी जानना जरूरी है। सूचना के अधिकार से प्राप्त एक जानकारी बेहद गंभीर और चिन्ताजनक है। अनेकों सवाल खड़ा करती है। सच सामने है बस पुनरावृत्ति न हो। काश ऐसा हो पाता क्योंकि इस बावत कोई प्रभावी कार्रवाई हो पाई हो ऐसा भी नहीं दिखता। आगे उत्तर मिल पाएगा यह भी नहीं पता। लेकिन सच यही है कि 2011 से 2019 तक यानी महज 8 सालों में अकेले राजस्थान के कोटा शहर के विभिन्न कोचिंग संस्थानों के 104 छात्रों ने आत्महत्या की जिनमें 31 लड़कियां भी हैं। जान देने वाले मेडिकल और इंजीनियरिंग की कड़े कॉम्पीटीशन की तैयारियों में जुटे थे जिसमें लाखों लोगों का रेला होता है।

नीमच के चन्द्रशेखर गौड़ को कोटा पुलिस ने जानकारी देकर बताया है कि 2011 में 6, 2012 में 9, 2013 में 13, 2014 में 8, 2015 में 17, 2016 में 16, 2017 में 7, 2018 में 20 और 2019 में 8 ने आत्महत्या की। मरने वालों की उम्र 15 साल से 30 साल के बीच थी। ये राजस्थान, बिहार, हिमांचल प्रदेश, असम, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र, झारखण्ड, केरल, गुजरात, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु यानी देश के हर क्षेत्र से थे। थोड़ा पीछे देखना होगा। 15 से 20 साल पहले कोचिंग का मतलब व्यक्तिगत रूप से किसी विद्यार्थी की मदद थी। अब यह सेक्टर संगठित इण्डस्ट्री का रूप ले चुका है। अनुमानतः अभी यह नया सेक्टर कम से कम 100 से 200 अरब डॉलर के बीच कारोबार करता है।

यह भी सोचना ही होगा कि उन्मुक्त हवा में पल और बढ़ रही संतान अच्छे कैरियर के लिए एकाएक नाजुक उम्र में सैकड़ों मील दूर अकेले भेज दी जाए जहां एक बन्द कमरे में उसे सिवाय पढ़ने और खाने-पीने के लिए कुछ भी नसीब न हो? जाहिर है जहां यह अनुभव अनचाहे ही सही बेहद पीड़ादायक तो होता है। वहीं उनकी बिगड़ती मानसिक स्थिति से अनजान अभिभावक भी बेखबर रहता है। बस यही दूरी ही कई बार बुरी हो जाती है।

देशभर में कोचिंग संस्थानों के सफलता की घूटी पिलाने के मकड़जाल में 90 से 95 प्रतिशत अभिभावक अभिमन्यु की भांति चक्रव्यूह में उलझ तो जाते हैं लेकिन निकलने तक जो हश्र होता है वह सिवाय उनके कोई और जानता भी नहीं है। ग्लानिवश अपने मर्म और दर्द को किसी से कह भी नहीं पाता।

यह समझना होगा, भ्रम भी तोड़ना होगा कि कोचिंग ही कॉम्पीटीशन के सांचे में ढ़ालने का जरिया नहीं बल्कि कोचिंग में ढ़लने के लिए घर से ही तैयारी हो जिसका मकसद सिर्फ प्रतियोगिता की तैयारी हो न कि वो तथाकथित घूटी की जिसके दम पर बेहतर नतीजों का दम भरा जाता है। कोचिंग की होड़ और रात-दिन फैलते दायरे के साथ ही सबसे जरूरी है इनके नियंत्रण और नियमन की। तत्काल सख्त और प्रभावी कानून बने।

कोचिंग केन्द्रों की लक्ष्मण रेखा तय हो ताकि झूठे सब्जबाग दिखाने और पैसा कमाने से इतर प्रतिस्पर्धा के पवित्र मकसद को समझा वहां पहुंचने वालों को सही मार्गदर्शन और जरूरी तैयारियाँ कराने का मंदिर बन सकें।

नोट: इस लेख में व्‍यक्‍त व‍िचार लेखक की न‍िजी अभिव्‍यक्‍त‍ि है। वेबदुन‍िया का इससे कोई संबंध नहीं है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

health care tips: खून गाढ़ा होने के प्रमुख लक्षण, रोग, कारण और उपचार

Main Door Vastu: मुख्य दरवाजे पर भूलकर भी न लगाएं ऐसी तस्वीरें, घर में आती है बदहाली

आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

गैस सिलेंडर खत्म होने का डर छू मंतर! बिना LPG गैस के भी पक सकता है खाना, ये 7 तरीके हैं सबसे बेस्ट

सभी देखें

नवीनतम

भारत का वह 'हार्मुज़', जो चीन को तबाह कर सकता है...!

Easter Sunday 2026: ईस्टर संडे का महत्व, इतिहास और पौराणिक परंपराएं

Easter Saturday: ईस्टर सैटरडे क्या होता है, ईसाई समुदाय के लिए इसका क्या है महत्व

मधुमेह रोगियों को नारियल पानी कब पीना चाहिए?

Good Friday: गुड फ्राइडे से जुड़ी 6 खास परंपराएं जानिए

अगला लेख