ramcharitmanas

मालवा-निमाड़ के चुनावी रण में दिग्गजों का सियासी भविष्य दांव पर

Webdunia
मंगलवार, 27 नवंबर 2018 (17:02 IST)
इंदौर। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों का 28 नवंबर यानी बुधवार को होने वाला मतदान मालवा-निमाड़ अंचल के कई वरिष्ठ राजनेताओं का सियासी भविष्य भी तय करेगा। सत्ता की चाबी कहे जाने वाले इस क्षेत्र में भाजपा ने अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखने के लिए जोर लगाया है, तो कांग्रेस ने पिछले 15 साल से सत्तारुढ़ दल के गढ़ में सेंध लगाने की भरसक कोशिश की है।


मालवा-निमाड़ अंचल की अलग-अलग सीटों से भाजपा की ओर से चुनावी मैदान में उतरे वरिष्ठ राजनेताओं में पारस जैन (68), अर्चना चिटनीस (54), अंतरसिंह आर्य (59), विजय शाह (54) और बालकृष्ण पाटीदार (64) शामिल हैं। पांचों नेता शिवराज सिंह चौहान की निवर्तमान भाजपा सरकार में मंत्री हैं। इनके अलावा, प्रदेश के पूर्व मंत्री और मौजूदा भाजपा विधायक महेंद्र हार्डिया (65) भी इसी अंचल की इंदौर-पांच सीट से फिर उम्मीदवार हैं। उधर, कांग्रेस की ओर से मालवा-निमाड़ अंचल में किस्मत आजमा रहे दिग्गजों में चार पूर्व मंत्री-सुभाष कुमार सोजतिया (66), नरेंद्र नाहटा (72), हुकुमसिंह कराड़ा (62) और बाला बच्चन (54) शामिल हैं। इसी क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे दो अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता-विजयलक्ष्मी साधौ (58) और सज्जन सिंह वर्मा (66) गुजरे बरसों के दौरान अपने अलग-अलग कार्यकालों में सांसद और प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

कुल 230 सीटों वाली प्रदेश विधानसभा में मालवा-निमाड़ अंचल की 66 सीटें शामिल हैं। पश्चिमी मध्यप्रदेश के इंदौर और उज्जैन संभागों में फैले इस अंचल में आदिवासी और किसान तबके के मतदाताओं की बड़ी तादाद है। मालवा-निमाड़ का चुनावी महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान इस क्षेत्र में बड़ी रैलियों को सम्बोधित किया है।

सत्ता विरोधी रुझान को लेकर कांग्रेस के आरोपों के बीच सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा के लिए इस बार मालवा-निमाड़ में चुनावी लड़ाई आसान नहीं है। सत्तारुढ़ दल को टिकट वितरण पर अपने ही खेमे में गहरे असंतोष का सामना करना पड़ा है और कुछ बागी नेता निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर उसकी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। उधर, पिछले 15 साल से सूबे की सत्ता से वनवास झेल रही कांग्रेस मालवा-निमाड़ अंचल में अपना खोया जनाधार हासिल करने की चुनौती से जूझ रही है जबकि यह इलाका एक जमाने में उसका गढ़ हुआ करता था। मालवा-निमाड़ अंचल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की जड़ें भी बहुत गहरी हैं।

ऐसे में जानकारों का आकलन है कि इस क्षेत्र में चुनाव परिणाम तय करने में संघ फैक्टर भी अहम भूमिका निभा सकता है। वर्ष 2013 के पिछले विधानसभा चुनावों में मालवा-निमाड़ की 66 सीटों में से भाजपा ने 56 सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस को केवल नौ सीटों से संतोष करना पड़ा था। भाजपा के बागी नेता के खाते में एक सीट आई थी जिसने अपनी पार्टी से टिकट नहीं मिलने के कारण निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

बहन से राखी बंधाकर गया था दिल्‍ली, वापस नहीं लौटा देवास का अर्पित, लापरवाही ने ले ली 18 साल के बेटे की जान

Electric Scooter : Simple Wave का Review, दमदार परफॉर्मेंस के साथ 243 KM तक रेंज, खूबियां और कीमत भी जानना जरूरी

ChatGPT Users के लिए बड़ी खबर, Plus सब्सक्राइबर्स के लिए GPT-6 Astra का रोलआउट शुरू, जानिए कैसे मिलेगा एक्सेस

LPG Cylinder Booking Rule Changed : अब गांव-शहर में 25 दिन बाद बुक होगा घरेलू गैस सिलेंडर, सरकार ने दी बड़ी राहत

कौन है हरिराम बंसल जिसे दिल्ली बिल्डिंग हादसे में पुलिस ने किया गिरफ्तार?

सभी देखें

नवीनतम

इंदौर में पेड़ गिरा, डिप्टी कलेक्टर की मां की दर्दनाक मौत, बहन और बहनोई बुरी तरह घायल, रेस्‍क्‍यू के लिए पहुंची टीम

बहन से राखी बंधाकर गया था दिल्‍ली, वापस नहीं लौटा देवास का अर्पित, लापरवाही ने ले ली 18 साल के बेटे की जान

सागर में जहरीली शराब से अब तक 22 की मौत, 100 से अधिक की हालत गंभीर, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

हिमाचल में चंद्रताल और गेपांग गथ समेत 9 झीलें बनीं 'वॉटर बम' जरा सी हलचल से तबाह हो सकते हैं 15 पुल और शहर

अगला लेख