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मकर संक्रांति के दिन करते हैं ये 7 महत्वपूर्ण कार्य : Makar Sankranti 2022

Webdunia
शनिवार, 8 जनवरी 2022 (18:24 IST)
मकर सक्रांति देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाई जाती है। इस त्योहार का हर प्रांत में अलग-अलग महत्व है। इस त्योहार को मनाए जाने की हर प्रांत में भिन्न-भिन्न परंपरा है। आओ जानते हैं कि इस दिन खासकर क्या करने की परंपरा रहती है।
 
 
1. सूर्य आराधना का दिन : इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। इसे सोम्यायन भी कहते हैं। 6 माह सूर्य उत्तरायन रहता है और 6 माह दक्षिणायन। अत: यह पर्व 'उत्तरायन' के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति से लेकर कर्क संक्रांति के बीच के 6 मास के समयांतराल को उत्तरायन कहते हैं। इस दिन से दिन धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है और रातें छोटी। इसीलिए सूर्य आराधना और वंदना की जाती है।
 
2. पतंग महोत्सव : यह पर्व 'पतंग महोत्सव' के नाम से भी जाना जाता है। पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना। यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। अत: उत्सव के साथ ही सेहत का भी लाभ मिलता है।
 
3. स्नान : माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का हजार गुना पुण्य होता है।
 
4. दान : इस दिन दान करने के खासा महत्व है। तिल, गुड़, खिचड़ी, नए वस्त्र, कंबल आदि दान करने के साथ ही दक्षिणा भी दी जाती है।
 
5. गाय को हरा चारा खिलाना : इस दिन विशेष तौर पर गायों को हरा चारा खिलाया जाता है। इसी दिन मलमास भी समाप्त होने तथा शुभ माह प्रारंभ होने के कारण लोग दान-पुण्य से अच्छी शुरुआत करते हैं। इस दिन को सुख और समृद्धि का माना जाता है।
 
6. मेला : इस दिन कई जगहों के साथ ही इस दिन गंगासागर में मेला भी लगता है।
 
7. तिल गुड़ खाना : सर्दी के मौसम में वातावरण का तापमान बहुत कम होने के कारण शरीर में रोग और बीमारियां जल्दी लगती हैं इसलिए इस दिन गुड़ और तिल से बने मिष्ठान्न या पकवान बनाए, खाए और बांटे जाते हैं। इनमें गर्मी पैदा करने वाले तत्वों के साथ ही शरीर के लिए लाभदायक पोषक पदार्थ भी होते हैं। उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक का प्रसाद बांटा जाता है।

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