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Mahabharat : श्रीकृष्ण के हाथों मरने के बाद द्रौपदी के भाई बनकर जन्मे एकलव्य और लिया बदला

अनिरुद्ध जोशी
महाभारत की कथा में कई अंतरकथाएं हैं और कई कथाएं जनश्रुति या मान्यता के आधार पर भी हैं। उन्हीं में से एक कथा है एकलव्य की। सभी जानते हैं कि एकलव्य को गुरु द्रोण ने शिक्षा नहीं दी थी और बाद में उन्होंने दक्षिणा के रूप में एकलव्य का अंगूठा मांग लिया था। क्योंकि गुरु द्रोण नहीं चाहते थे कि अर्जुन के अलावा कोई भी श्रेष्ठ धनुर्धर हो। दूसरा यह कि उन्होंने भीष्म पितामह को वचन दिया था कि मैं कौरवपुत्रों के अलावा किसी को शिक्षा नहीं दूंगा।
 
 
1. ऐसी मान्यता है कि अंगूठा कट जाने के बाद भी एकलव्य की धनुष विद्या में कोई कमी नहीं आई थी। महाभारत काल में एकलव्य अपनी विस्तारवादी सोच के चलते जरासंध से जा मिला था। जरासंध की सेना की तरफ से उसने मथुरा पर आक्रमण करके एक बार यादव सेना का लगभग सफाया कर दिया था।
 
2. ऐसा भी कहा जाता है कि यादव सेना के सफाया होने के बाद यह सूचना जब श्रीकृष्‍ण के पास पहुंचती है तो वे भी एकलव्य को देखने को उत्सुक हो जाते हैं। दाहिने हाथ में महज चार अंगुलियों के सहारे धनुष बाण चलाते हुए एकलव्य को देखकर वे समझ जाते हैं कि यह पांडवों और उनकी सेना के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। तब श्रीकृष्‍ण का एकलव्य से युद्ध होता है और इस युद्ध में एकलव्य वीरगति को प्राप्त होता है। हालांकि यह भी कहा जाता है कि युद्ध के दौरान एकलव्य लापता हो गया था। अर्थात उसकी मृत्यु बाद में कैसे हुई इसका किसी को पता नहीं है।
 
 
3. पौराणिक कथाओं के अनुसार एकलव्य पूर्व जन्म में भगवान कृष्ण के चचेरे भाई थे। वह श्रीकृष्ण के पिता वासुदेव के भाई देवश्रवा के पुत्र थे। एक दिन देवश्रवा जंगल में खो जाते हैं, जिन्हें हिरान्यधाणु खोजते हैं, इसलिए एकलव्य को हिरान्यधाणु का पुत्र भी कहा जाता है। यह भी कहा जाता है कि एकलव्य भगवान श्रीकृष्ण के पितृव्य (चाचा) के पुत्र थे जिसे बाल्यकाल में ​ज्योति​ष के आधार पर वनवासी भीलराज निषादराज हिरण्यधनु को सौंप दिया गया था।
 
 
4. ऐसी मान्यता है कि एकलव्य की मृत्यु कृष्ण के हाथों रुकमणि हरण के दौरान हुई थी। इस दौरान वह पिता की रक्षा करते हुए मारे गए थे, परंतु तब श्री कृष्ण ने उन्हें द्रोण से बदला लेने के लिए फिर जन्म लेने का वरदान दे दिया था।
 
5. श्रीकृष्ण के वरदान के बाद एकलव्य ने द्रुपद के बेटे धृष्टद्युम्न के रूप में जन्म लिया और महाभारत के युद्ध के दौरान उन्होंने अंगूठे के बदले में द्रोण का सिर काट दिया था। द्रुपद की पुत्री ही द्रोपदी थीं जो धृष्टद्युम्न की बहन थीं।

हालांकि उपरोक्त कथा की पुष्टि नहीं की जा सकती है।

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