Publish Date: Tue, 08 Sep 2026 (17:12 IST)
Updated Date: Tue, 08 Sep 2026 (17:15 IST)
उज्जैन के सती गेट पर अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा के विस्थापन को लेकर साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों का विरोध जारी है। प्रशासन पिछले करीब पांच दिनों से प्रतिमा को हटाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन सफलता नहीं मिली है।
भगवान खड़े हनुमान की प्रतिमा हटाए जाने की जानकारी मिलने के बाद से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं, इस बीच सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि यह चमत्कार है कि हनुमान जी वहां से नहीं हट रहे हैं। यह कहा जा रहा है कि यह चमत्कार है और प्रशासन को आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। इस तरह की आस्था और चमत्कार को लेकर कई तरह की रील्स और वीडियो बनाकर प्रसारित किए जा रहे हैं।
क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार : दूसरी तरफ हनुमानजी की प्रतिमा नहीं हटने के पीछे तकनीकी तर्क भी सामने आ रहे हैं। वेबदुनिया ने उज्जैन के स्थानीय पत्रकारों और कुछ नागरिकों से इस बारे में चर्चा की। चर्चा में सामने आया कि प्रतिमा के आसपास की खुदाई को लेकर सावधानी बरत रहा है। उन्होंने बताया कि मंदिर के आसपास तो खुदाई हो गई है, अब प्रतिमा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए उसे आसपास से खोदा जा रहा है। ऐसे में हनुमानजी की प्रतिमा को कोई नुकसान न पहुंचे, मूर्ति को किसी तरह का डैमेज न हो इस बात का खासा ध्यान रखा जा रहा है।
सीएम सिटी होने से अतिरिक्त सावधानी : पत्रकारों ने चर्चा में बताया कि दरअसल, उज्जैन सीएम सिटी है। मोहन यादव का गृहनगर होने और मामला आस्था से जुड़ा होने की वजह से खुदाई करने और प्रतिमा को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि मूर्ति जमीन के काफी अंदर तक जमी हुई है, ऐसे में गहरी खुदाई करने में इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। उन्होंने बताया कि अनुमान है कि दो से तीन दिन में प्रतिमा को उक्त स्थान से हटाकर सावधानीपूर्वक शिफ्ट कर दिया जाएगा।
कहीं लॉकिंग सिस्टम तो नहीं प्रतिमा में : बता दें कि यह दुर्लभ प्रतिमा मालवा के विशेष बेसाल्ट पत्थर से तैयार की गई है, जो परमार काल और राजा भोज के शासनकाल की शिल्पकला को दर्शाती है। प्रशासन पिछले करीब पांच दिनों से इस प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिमा को यहां लॉकिंग सिस्टम के मुताबिक स्थापित किया गया होगा। प्राचीन काल में लोहे या अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं होते थे। यही कारण है कि उस समय के इंजीनियर पत्थरों में छेद कर न केवल प्रतिमाओं, बल्कि भव्य मंदिरों का भी निर्माण कर देते थे।
आर्कियोलॉजिस्ट टीम की लेंगे मदद : बता दें कि प्रतिमा की गहराई की स्थिति जानने के लिए नीचे करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है। अब नगर निगम और जिला प्रशासन ने बिना जल्दबाजी के विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। आर्कियोलॉजिस्ट की टीम अत्याधुनिक मशीनों से प्रतिमा के आधार, अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही प्रतिमा को हटाने की अगली तकनीक तय की जाएगी।
क्यों विस्थापित हो रही प्रतिमा : बता दें कि उज्जैन के कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक की सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस मार्ग पर प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर है। पिछले कुछ दिनों से प्रतिमा को हटाने के लिए चार बार प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई। मंदिर भवन के गर्भगृह और मुख्य ढांचे को तोड़ा जा चुका है। फिलहाल प्रतिमा को कैनोपी टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। मंदिर के बाहर स्थानीय श्रद्धालुओं ने चेतावनी भरा पोस्टर भी लगाया है। इसमें लिखा है कि प्रतिमा हटाने के दौरान यदि किसी भी तरह से प्रतिमा खंडित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ऐसे में प्रतिमा को विस्थापित करने में प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरता रहा है। इस बीच चमत्कार होने की रील्स और वीडियो भी सोशल मीडिया में प्रसारित हो रहे हैं।
About Writer
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्म में मास्टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्हें फिल्ड रिपोर्टिंग का अच्छा-खासा अनुभव है।
उन्होंने अखबार....
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