नदी नाचती रेत उछलती, पानी झर-झर गाता है। एक बुलबुला बहते-बहते, बन-बन कर मिट जाता है। नदी किनारे पेड़ खड़े हैं। कुछ छोटे कुछ बहुत बड़े हैं। इन पेड़ों को नदी किनारे, हरदम रहना भाता है। पानी झर-झर गाता है। पेड़ नहीं डरते पानी से, न आंधी की...