kids poem कड़क ठंड है कहीं न जाएं। घर में रहकर मौज मनाएं। सूरज जब हड़ताल पर बैठा, पाएं न हम भी क्यों छुट्टी। सब कामों से क्यों न कर लें, हम भी पूरी-पूरी कुट्टी। क्यों न बिस्तर बैठे ही, दूध जलेबी छककर खाएं। बात न पढ़ने लिखने...