Publish Date: Friday, 30 January 2026 (17:42 IST)
Updated Date: Friday, 30 January 2026 (01:44 IST)
मुन्ना हंसता मुन्नी हंसती,
रोज लगाते खूब ठहाके।
लगता खुशियों के सरवर में,
अभी आए हैं नहा-नहाके।
उनको हंसते देख पिताजी,
माताजी मुस्काने लगते।
हंसी-हंसी बस मस्ती-मस्ती,
गीत, तराने गाने लगते।
सारे घर को चहका देते,
दादाजी कहकहे लगाके।
घर की मस्ती देख देखकर,
सोफे भी इठलाने लगते।
तकिया चादर दरी रजाई,
उठ-उठकर सब गाने लगते।
गुंड कंसहड़ी थाल जताते।
खुशियां, ढम-ढम ढोल बजाके।
पीछे रहती क्यों दीवारें,
छप्पर छत कैसे चुप रहते।
होती घर में उछल कूद तो,
मन ही मन में वे भी हंसते।
दरवाजे भी धूम मचाते।
अपने परदे हिला-हिला के।