Hanuman Chalisa

अनुशासन और चींटी पर कविता

रामध्यान यादव 'ध्यानी'
चल-चलकर चींटी ना थकती,
करती अनुशासन की भक्ति।
खुद से ज्यादा बोझ उठाकर,
आसमान को लक्ष्य बनाकर।
 
प्रति पल आगे बढ़ती जाती,
कर्मभाव हमको सिखलाती।
गजब दृढ़ आदर्श हैं उसके, 
साथी कभी मार्ग ना भटके।
 
दृढ़ निश्चय कर वह बलखाती,
प्रेमभाव से पंक्ति बनाती।
प्रति पल आगे बढ़ाती जाती,
कर्मभाव हमको सिखलाती।
 
लिखे निरंतर ऐसी गाथा,
ठोंक रहा था भूपति माथा।
सदा पराजय उसके हाथ,
मिला उसे चींटी का साथ।
 
दृढ़ निश्चय कर कदम बढ़ाया,
विजय स्वयं उसके कर आया। 
यही मंत्र वह हमें बताती,
लक्ष्य निरंतर उसको भाती।
 
प्रति पल आगे बढ़ाती जाती,
कर्मभाव हमको सिखलाती।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

गर्मी में बेहतरीन स्वादिष्‍ट आम रस कैसे बनाएं, पढ़ें स्टेप बाय स्टेप विधि और खास कुकिंग टिप्स

B. R. Ambedkar Essay: बाबासाहेब अंबेडकर पर हिन्दी में आदर्श निबंध

मधुमेह रोगियों को नारियल पानी कब पीना चाहिए?

तपती गर्मी से राहत देगा आम का पन्ना, नोट करें विधि

घर पर बनाएं कीवी आइसक्रीम, जानिए इस सुपरफ्रूट के 6 हेल्दी फायदे

सभी देखें

नवीनतम

जब डुमरियागंज संसदीय सीट पर जब्त हुई मोहसिना की जमानत

अमेरिका का आर्तेमिस 2 चंद्र मिशन, जब पृथ्‍वी पीछे छूटती जा रही थी

इंदौर के महेश गनोकर पहुंचे अमेरिका के चुनावी मैदान में, जानें पूरी कहानी

Jyotiba Phule: ज्योतिबा फुले कौन थे, सामाजिक सुधार में उनका क्या योगदान था?

Guru Arjun Dev Ji: गुरु अर्जन देव जी का इतिहास क्या है?

अगला लेख