आसमान में उड़े बहुत हैं, सागर तल से जुड़े बहुत हैं। किंतु समय अब फिर आया है, हमको धरती चलना है। सोने जैसी खूब चमक है, बिजली-सी हर और दमक है। किंतु बड़ों ने समझाया है, भट्टी में तपकर गलना है। फैले चारों ओर बहुत हैं, तन-मन से...