Publish Date: Thu, 22 Oct 2026 (14:23 IST)
Updated Date: Thu, 22 Oct 2026 (14:48 IST)
Karwa Chauth Vrat 2026: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का दिन सनातन परंपरा में अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। इस दिन सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी दाम्पत्य जीवन की कामना के लिए 'करवा चौथ' का निर्जला व्रत रखती हैं। उत्तर और मध्य भारत में अत्यंत उल्लास के साथ मनाया जाने वाला यह पावन पर्व इस वर्ष 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को पड़ेगा। यदि आप भी इस वर्ष करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, तो पूजा की तैयारी और प्रामाणिक विधि यहाँ से समझ सकती हैं।
करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय- दिल्ली समय के अनुसार रात्रि 08:17 बजे।
करवा चौथ पूजा की आवश्यक सामग्री
पूजन को पूर्ण और विधि-विधान से संपन्न करने के लिए इन सामग्रियों को पहले से एकत्रित कर लें:
करवा एवं जल पात्र: मिट्टी का टोंटीदार करवा व उसका ढक्कन, एक जल का लोटा और पूजा की छलनी।
पूजन एवं अर्पण सामग्री: पीली मिट्टी (गौरी जी बनाने के लिए), लकड़ी की चौकी, अक्षत (चावल), कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, चंदन, धूप-अगरबत्ती, दीपक, कपूर, रुई, पुष्प और गेहूं।
पंचामृत व नैवेद्य: कच्चा दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, शकर, गंगाजल, मिठाई, शकर का बूरा, हलवा और आठ पूरियों की अठावरी।
सुहाग की सामग्री: चुनरी, मेहंदी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, महावर (आलता), बिछुआ, कंघा और अन्य श्रृंगार वस्तुएँ।
अन्य: दक्षिणा के लिए कुछ नकद राशि।
करवा चौथ की संपूर्ण पूजन विधि
1. प्रातः काल और संकल्प
सूर्योदय से पूर्व (सरगी के समय) उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करके सोलह श्रृंगार करें।
इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय इस मंत्र का उच्चारण करें:
'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।'
2. संध्या पूजन और स्थापना
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शाम को पूजा के स्थान पर लकड़ी की चौकी रखें। बालू या पीली मिट्टी से वेदी बनाकर माता पार्वती (गौरी जी) और गणेश जी की स्थापना करें।
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मूर्ति उपलब्ध न होने पर सुपारी पर मौली (नाड़ा) लपेटकर भी देव-आवाहन किया जा सकता है।
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माता पार्वती को सुहाग की सभी वस्तुएँ अर्पित करें और कोरे करवे में जल भरकर पूजन शुरू करें।
3. देव पूजन के मुख्य मंत्र
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पूजा के समय संबंधित देवी-देवताओं के इन मंत्रों का जप करें:
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माता पार्वती: 'ॐ शिवायै नमः'
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भगवान शिव: 'ॐ नमः शिवाय'
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भगवान गणेश: 'ॐ गणेशाय नमः'
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स्वामी कार्तिकेय: 'ॐ षण्मुखाय नमः'