dharma sangrah

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी पर मंगला आरती का रहस्य एवं धार्मिक महत्व

Advertiesment
Banke Bihari Temple
वृंदावन स्थित प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की अपनी एक अनूठी और अनुपम परंपरा है। यहाँ भगवान कृष्ण की उपासना एक नन्हे बालक (ठाकुर जी) के रूप में की जाती है। मंदिर की दिनचर्या में भी ठाकुर जी की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि पूरे वर्ष में केवल जन्माष्टमी के अवसर पर ही यहाँ मंगला आरती की जाती है, जबकि सामान्य दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में मंगला आरती नहीं होती। इस विशेष परंपरा और धार्मिक व्यवस्था के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण और मान्यताएं हैं:

1. बालक स्वरूप के प्रति वात्सल्य और स्नेह का भाव

विश्राम की महत्ता: मंदिर में ठाकुर जी को एक छोटे बालक के रूप में पूजा जाता है। जिस प्रकार माता-पिता अपने छोटे बच्चे को सुबह-सुबह जल्दी नहीं जगाते, उसी प्रकार भक्तों का मानना है कि बांके बिहारी जी को सुबह देर तक विश्राम करने देना चाहिए।
प्रसन्नचित्त भाव: मान्यता है कि पर्याप्त विश्राम से ठाकुर जी पूरे दिन ऊर्जावान और प्रसन्न रहते हैं तथा भक्तों को दर्शन देकर उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं।
निरंतर पर्दा लगाने की परंपरा: मंदिर में हर कुछ मिनट के अंतराल पर बिहारी जी के सामने पर्दा हटाया और लगाया जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि कोई भी भक्त लगातार ठाकुर जी के अलौकिक सौंदर्य को देखकर अत्यधिक भावविभोर न हो जाए और उनकी दृष्टि से ठाकुर जी को कोई दोष न लगे।
 

2. निधिवन की रासलीला की पौराणिक मान्यता

रात्रि की रासलीला: जनश्रुति और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बांके बिहारी जी रात्रि के समय वृंदावन स्थित निधिवन में गोपियों के साथ रास रचाने जाते हैं।
विश्राम की आवश्यकता: ऐसा माना जाता है कि देर रात तक रासलीला करने के कारण ठाकुर जी अत्यधिक थक जाते हैं और रात्रि के तीसरे पहर में ही मंदिर लौटते हैं। इस थकान को दूर करने के लिए उन्हें सुबह देर तक सोने दिया जाता है, जिसके कारण प्रतिदिन सुबह जल्दी मंगला आरती नहीं की जाती।
 

3. जन्माष्टमी पर मंगला आरती का अपवाद

जन्मोत्सव की परंपरा: जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के अवतरण का पावन पर्व है। इस दिन भक्त अपने प्रिय लाला के जन्म की खुशी में पूरी रात जागरण करते हैं।
मध्यरात्रि में जन्म: चूँकि भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्म के तुरंत बाद उनके स्वागत और प्रथम दर्शन के लिए विशेष रूप से मंगला आरती का आयोजन किया जाता है।
वार्षिक विशेष आयोजन: साल में केवल यही एक ऐसा विशेष अवसर होता है, जब बांके बिहारी मंदिर के पट तड़के मंगला आरती के लिए खोले जाते हैं, जिससे भक्त अपने नटखट गोपाल का जन्मोत्सव मना सकें।
इस प्रकार, बांके बिहारी मंदिर की यह अनोखी परंपरा भगवान और भक्त के बीच के निश्चल प्रेम, वात्सल्य भाव और प्राचीन आस्था का सजीव उदाहरण है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

मंगल-शनि का केंद्र योग बढ़ाएगा तनाव! 4 राशियों की किस्मत का पलट जाएगा पासा