dharma sangrah

Eid e Milad un Nabi 2025: ईद मिलादुन्नबी क्यों और कैसे मनाई जाती है, जानें इतिहास और महत्व

WD Feature Desk
शुक्रवार, 5 सितम्बर 2025 (09:30 IST)
Id-e-Milad: मिलाद-उन-नबी एक इस्लामी त्योहार है जो पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह हिजरी कैलेंडर के तीसरे महीने, रबी-उल-अव्वल, की 12वीं तारीख को मनाया जाता है। इस दिन मुसलमान पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन को उनके जन्म, जीवन, शिक्षाओं और अनुकरणीय चरित्र को याद करके मनाते हैं। वर्ष 2025 में मिलाद-उन-नबी 04 से 05 सितंबर यानी गुरुवार से शुक्रवार के बीच मनाई जा सकती है। 
 
इतिहास और महत्व : मिलाद-उन-नबी का इतिहास 13वीं शताब्दी से जुड़ा है, जब इसे मिस्र में आधिकारिक तौर पर मनाया जाने लगा। धीरे-धीरे यह त्योहार दुनिया भर के मुसलमानों के बीच लोकप्रिय हो गया। इस दिन पैगंबर मुहम्मद के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनके संदेशों को याद किया जाता है। पैगंबर ने इस्लाम धर्म की स्थापना की और उनके दिखाए रास्ते पर चलकर मुसलमान जीवन में नेक काम करने और अल्लाह की इबादत करने की कोशिश करते हैं। मुस्लिम समुदाय के लिए यह त्योहार खुशियां लेकर आता है। दुनिया भर के मुसलमान पैगंबर मुहम्मद को श्रद्धांजलि देते हैं।
 
कैसे मनाया जाता है : मिलाद-उन-नबी का उत्सव दुनिया भर में विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है।
 
• जुलूस/ Juloos: इस दिन जगह-जगह जुलूस निकाले जाते हैं, जिसमें लोग 'नाअत' (पैगंबर की शान में लिखी गई कविताएं) पढ़ते हुए चलते हैं।
 
• प्रार्थना और इबादत: मस्जिदों और घरों में विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं, और कुरान की तिलावत (पाठ) होती है।
 
• दावतें और लंगर: कई जगहों पर गरीबों और ज़रूरतमंदों को खाना खिलाया जाता है, जिसे लंगर या दावत कहा जाता है।
 
• उपदेश/ Sermons: पैगंबर मुहम्मद के जीवन और शिक्षाओं पर उपदेश दिए जाते हैं ताकि लोग उनके दिखाए मार्ग पर चल सकें।
 
• शिक्षा और सभा: इस दिन नए कपड़े पहनते हैं और विशेष नमाज़ अदा करते हैं। पैगंबर पैगंबर मुहम्मद का जन्म अरब के एक शहर 'मक्का' में हुआ था। और माना जाता है कि उनकी शिक्षाएं बहुत मूल्यवान होने के कारण मुसलमान समाजवासी पैगंबर मुहम्मद की महान शिक्षाओं को याद करने और उन पर चर्चा करने के लिए सभाएं आयोजित करते हैं। 
 
मिलाद-उन-नबी बहुप्रतीक्षित मुस्लिम त्योहारों में से एक है। ये सिर्फ एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह पैगंबर मुहम्मद के आदर्शों और शिक्षाओं को याद करने और उन्हें अपने जीवन में उतारने का एक अवसर है। 
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Ganesh chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी के बाद यदि नहीं करना चाहते हैं गणपति मूर्ति का विसर्जन तो क्या करें?
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 08 सितंबर 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

Ganpati Maha Aagman: बप्पा के आगमन से लेकर विसर्जन तक बदल जाती है मुंबई की धड़कन

माता वेलंकन्नी पर्व, तमिलनाडु के ईसाइयों का त्योहार

Pola Amavasya 2026: पिठोरी अमावस्या 2026: संकट दूर करने के 5 अचूक उपाय

गणेश उत्सव 2026: गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और स्थापना विधि

अगला लेख