Hanuman Chalisa

शहीद राजगुरु और सुखदेव का जीवन परिचय

Webdunia
शिवराम राजगुरु Shivaram Rajguru: शहीद राजगुरु का जन्म 24 अगस्त, 1908 को पुणे जिले के खेड़ा गांव में हुआ था। उनका पूरा नाम शिवराम हरि राजगुरु था। उनके पिता का नाम श्री हरि नारायण तथा माता का नाम पार्वती बाई था। वे बचपन से ही वीर और साहसी थे। उनकी शिक्षा वाराणसी में हुई तथा यहीं उनका संपर्क क्रांतिकारियों से हुआ था। राजगुरु चंद्रशेखर आजाद से बहुत प्रभावित हुए तथा हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी से जुड़ गए और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अपना नाम अमर कर दिया। वे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों से भी बेहद प्रभावित थे। वे सबसे अच्छे निशानेबाज माने जाते थे। 
 
जब पुलिस की बर्बर पिटाई से लाला लाजपत राय की मौत हुई तब उनकी मौत का बदला लेने के लिए राजगुरु ने 19 दिसंबर, 1928 को भगत सिंह के साथ मिलकर लाहौर में अंग्रेज सहायक पुलिस अधीक्षक जेपी सांडर्स को गोली मार दी थी और खुद ही गिरफ्तार हो गए थे। 23 मार्च 1931 को उन्हें भगत सिंह तथा सुखदेव के साथ लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी पर चढ़ाया गया था। राजगुरु को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख क्रांतिकारी माना जाता है। 
 
सुखदेव थापर Sukhdev Thapar- सुखदेव का जन्म 15 मई 1907 को पंजाब के लायलपुर पाकिस्तान में हुआ था। बचपन से ही सुखदेव के मन में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी। अपने बचपन से ही उन्होंने भारत में अंग्रेजी हुकूमत के जुल्मों को देखा और इसी के चलते वह गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए क्रांतिकारी बन गए। भगतसिंह और सुखदेव के परिवार पास-पास ही रहते थे और इन दोनों में गहरी दोस्ती थी। साथ ही दोनों लाहौर नेशनल कॉलेज के छात्र थे। सांडर्स हत्याकांड में इन्होंने भगत सिंह तथा राजगुरु का साथ दिया था। वे कॉलेज में युवाओं में देशभक्ति की भावना भरते और उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़ने के लिए प्रेरित करते थे। 
 
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में सुखदेव थापर एक ऐसा नाम है जो न सिर्फ अपनी देशभक्ति, साहस और मातृभूमि पर कुर्बान होने के लिए जाना जाता है और शहीद-ए-आजम भगत सिंह के अनन्य मित्र के रूप में उनका नाम इतिहास में दर्ज है। वे एक कुशल नेता के रूप में वह कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को भारत के गौरवशाली अतीत के बारे में भी बताया करते थे। सुखदेव ने अन्य क्रांतिकारी साथियों के साथ मिलकर लाहौर में नौजवान भारत सभा शुरू की। यह एक ऐसा संगठन था जो युवकों को स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करता था। सुखदेव ने युवाओं में न सिर्फ देशभक्ति का जज्बा भरने का काम किया, बल्कि खुद भी क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। 
 
1928 की उस घटना के लिए सुखदेव का नाम प्रमुखता से जाना जाता है, जब क्रांतिकारियों ने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए गोरी हुकूमत के कारिंदे पुलिस उपाधीक्षक जेपी सांडर्स को मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य को हिलाकर रख दिया था और पूरे देश में क्रांतिकारियों की जय-जय कार हुई थी। सांडर्स की हत्या के मामले को ‘लाहौर षड्यंत्र’ के रूप में जाना गया। 
 
अंग्रेजी हुकूमत को अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों से दहला देने वाले राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह को मौत की सजा सुनाई गई। मात्र 24 साल की उम्र में सुखदेव  इस दुनिया से विदा हो गए। 23 मार्च 1931 को तीनों क्रांतिकारी हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए और देश के युवाओं के मन में आजादी पाने की नई ललक पैदा कर गए। 
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas

ताड़ासन शरीर को फौलादी और सुडौल बनाने वाला योगासन, इसके हैं 5 फायदे

सनातन परंपरा का यह एक नियम, जिसे अब मान रही है मॉडर्न साइंस; रोज सुबह करने से बीमारियां रहेंगी कोसों दूर

पैरों की पिंडलियों को सुडौल और पतला करने हेतु आजमाएं ये 6 असरदार उपाय

सिर्फ एक अंडा! वैज्ञानिकों ने बताया दिमाग तेज करने का 'सीक्रेट फॉर्मूला'

सभी देखें

नवीनतम

अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष

Maharana Pratap: महाराणा प्रताप के जन्म के 5 रोचक किस्से

ध्यान पर दोहे: भटके पथ से लौटकर, मन पाए विश्राम

त्रिपुरा चुनाव में कुल 822 वोट पाने वाली पार्टी (NCPI) लोकसभा में बनी NDA की नई 'पॉवर प्लेयर'!

Global Wind Day 2026: विश्व पवन दिवस क्या है, क्यों मनाया जाता है?

अगला लेख