Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 (13:02 IST)
Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 (13:05 IST)
- सत्यसाईं पर 746 मीटर लंबा 6-लेन फ्लायओवर बन रहा।
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मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था प्रोजेक्ट।
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2.5 साल से भी अधिक का समय बीत चुका है।
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15 मार्च 2024 को जारी किया गया था वर्क ऑर्डर।
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करीब 62 करोड़ रुपए की लागत से होगा तैयार।
आर्थिक राजधानी इंदौर में विकास के दावों और हकीकत के बीच का अंतर अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शुमार सत्यसाईं चौराहे पर बनाए जा रहे 6-लेन फ्लायओवर की सुस्त रफ्तार ने रोजाना यहां से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों का जीना मुहाल कर दिया है। प्रशासनिक सुस्ती और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का आलम यह है कि तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है, और ऊपर से मानसून ने हालात को और बदतर बना दिया है।
प्रोजेक्ट एक नजर में: डिजाइन, लागत और समय-सीमामध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) की देखरेख में बन रहे इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के आंकड़े और इसकी मौजूदा स्थिति कुछ इस प्रकार है।
लागत (Cost): इस बहुप्रतीक्षित 6-लेन फ्लायओवर प्रोजेक्ट पर लगभग 62 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
लंबाई और डिजाइन (Design & Length): चौराहे पर ट्रैफिक के भारी दबाव को देखते हुए इसे करीब 746 मीटर लंबा 6-लेन फ्लायओवर डिजाइन किया गया है, ताकि भविष्य में यह जंक्शन पूरी तरह सिग्नल-फ्री हो सके।
तय समय-सीमा (Deadline): इस प्रोजेक्ट का वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद इसे मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, निर्धारित डेडलाइन निकले हुए महीने बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रोजेक्ट का बड़ा हिस्सा अब भी अधूरा है। फ्लायओवर निर्माण शुरू हुए 2.5 साल से भी अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अब तक आम लोग इस प्रोजेक्ट के पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं।
बारिश में और गहराया संकट: कीचड़, गड्ढे और रोज का जाम। सत्यसाईं चौराहे पर इन दिनों हालात यह हैं कि जरा सी बारिश में ही सर्विस रोड तालाब में तब्दील हो जाती है। देवास नाका से विजय नगर और एबी रोड से बसंत विहार की ओर जाने वाले मार्गों पर बड़े-बड़े और गहरे गड्ढे बन गए हैं। सड़कों पर फैले कीचड़ और निर्माण सामग्री के मलबे के कारण दोपहिया वाहन चालकों का स्लिप होकर गिरना आम बात हो गई है। पीक आवर्स में यहां मीलों लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है, जिससे आम जनता का कीमती समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
जिंदगी से खिलवाड़: एंबुलेंस भी फंस रही जाम में इस इलाके की सबसे गंभीर समस्या यह है कि इसके आसपास कई बड़े अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र स्थित हैं। चौराहे और सर्विस रोड पर फैली अव्यवस्था के कारण आपातकालीन स्थिति में आने वाली एंबुलेंस तक देर तक ट्रैफिक जाम में फंसी रहती हैं। जरा सी प्रशासनिक चूक या प्रोजेक्ट में देरी किसी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार महकमों की नींद नहीं टूट रही है।
प्रशासनिक लेट-लतीफी पर सवाल: प्रशासनिक बैठकों और कागजी दावों में भले ही विकास कार्यों को समय पर पूरा करने की बात कही जाती हो, लेकिन सत्यसाईं चौराहे की यह तस्वीर सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है। समय-सीमा निकल जाने के बाद भी काम अधूरा रहना और निर्माण एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई न होना यह बताता है कि मॉनिटरिंग कितनी कमजोर है। जनता अब बस यही सवाल पूछ रही है कि आखिर इन कागजी वादों और लेट-लतीफी के चक्रव्यूह से उन्हें कब मुक्ति मिलेगी और कब यह फ्लायओवर बनकर तैयार होगा।
समय सीमा निकले 4 महीने बीते : बता दें कि प्रोजेक्ट का काम मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था। एमपीआरडीसी द्वारा सत्यसाई चौराहे पर बनाए जा रहे फ्लायओवर का वर्क ऑर्डर 15 मार्च 2024 को जारी किया गया था, जिसे 62 करोड़ रुपए की लागत से 6 लेन का बनाया जाना है। इस प्रोजेक्ट का काम मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था, जिसकी निर्धारित समय सीमा को भी लगभग 4 महीने बीत चुके हैं लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी बहुत सारा काम बाकी बचा हुआ है।