Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

MYH का अदना सा फार्मासिस्ट कैसे बन बैठा करोड़पति, करोड़ों के प्लॉट, आलीशान बंगला, पूरे महकमे पर उठे सवाल

Advertiesment
rakesh gorkhe
इंदौर में एमवाय अस्‍पताल में पदस्‍थ फार्मासिस्‍ट के घर EOW के छापे में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। मंगलवार को फार्मासिस्ट राकेश गोरखे के कई ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई थी।

कार्रवाई की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सरकारी दवाओं के स्टॉक में कथित गड़बड़ी कर आय से करीब 108 प्रतिशत अधिक संपत्ति जमा कर ली। बता दें कि जांच के दौरान बिना विभागीय अनुमति थाईलैंड यात्रा करने का भी खुलासा हुआ है। अब फार्मासिस्ट राकेश गोरखे पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) का शिकंजा कस गया। बुधवार को हुई छापामार कार्रवाई में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने केवल आय से अधिक संपत्ति के मामले को ही नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज की खरीद प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे बढ़ती गई गोरखे की संपत्‍ति : ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच के अनुसार राकेश गोरखे और उसके परिवार की वैध आय चेक पीरियड में 1.11 करोड़ रुपए रही, जबकि उसके द्वारा अर्जित संपत्तियों का मूल्य 2.13 करोड़ रुपए से अधिक पाया गया। यानी वैध आय की तुलना में करीब 108 प्रतिशत अधिक संपत्ति। सवाल यह है कि आखिर एक फार्मासिस्ट ने इतना बड़ी संख्‍या में संपत्‍ति कैसे जुटा ली।

सामान्‍य कर्मचारी से करोड़पति तक : बता दें कि राकेश गोरखे की नियुक्ति वर्ष 2007 में एमवाय अस्पताल में हुई थी। शुरुआत में वह एक सामान्य कर्मचारी की तरह काम करता था। उस समय न तो उसका प्रशासन में कोई विशेष प्रभाव था और न ही वह किसी बड़े अधिकारी का करीबी माना जाता था। साल 2008 में उसने अपना अटैचमेंट एमजीएम मेडिकल कॉलेज की क्रय शाखा में करा लिया। यहीं से उसके करियर की दिशा बदलनी शुरू हुई।

जानकारों के मुताबिक वर्ष 2012 के आसपास तत्कालीन डीन डॉ. पुष्पा वर्मा के कार्यकाल में गोरखे की सक्रियता तेजी से बढ़ी। दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और अन्य खरीदी प्रक्रियाओं में उसकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई। खास बात यह रही कि खरीद से जुड़े अधिकांश कामों में उसकी मौजूदगी रहती थी, लेकिन वह दस्तावेजों पर सीधे हस्ताक्षर करने से बचता था। इससे निर्णय प्रक्रिया में प्रभाव तो बना रहा, लेकिन जिम्मेदारी से दूरी भी बनी रही।

2007 में हुई थी नियुक्ति: EOW के मुताबिक राकेश गोरखे की साल 2007 में फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्ति हुई थी। साल 2015 में उनका मासिक वेतन 18,711 रुपए था, जो 2025 में बढ़कर 54,664 रुपए हो गया। उनकी पत्नी कीर्ति गोरखे वर्ष 2010 से शासकीय दंत चिकित्सालय में लाइब्रेरियन हैं और वर्तमान में उनका मासिक वेतन 42,402 रुपए है।

बता दें कि EOW की कार्रवाई में इंदौर के अलग-अलग इलाकों में स्थित छह संपत्तियों का खुलासा हुआ। इनमें स्कीम नंबर-140 स्थित वृंदावन गार्डन का दो मंजिला मकान, साकार एनआरआई सिटी का बड़ा प्लॉट, साहिल इंद्रांचल होम्स, संघवी रेजीडेंसी और सद्गुरु नंदी विहार में प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा ओमेक्स डेवलपर्स में प्लॉट बुकिंग के लिए 6.70 लाख रुपए का भुगतान भी मिला है।

थाईलैंड यात्रा का भी खुलासा: छापेमारी के दौरान जब्त पासपोर्ट से पता चला कि राकेश गोरखे अक्टूबर 2023 में बिना विभागीय अनुमति थाईलैंड गए थे। EOW अब इस विदेश यात्रा पर हुए खर्च का भी आकलन कर रही है और उसे आरोपी के कुल व्यय में शामिल किया जाएगा। टीम ने छह संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक पासबुक, पासपोर्ट और 1.51 लाख रुपए नकद भी जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कई संपत्तियों की जानकारी अपने विभाग को नहीं दी थी। फिलहाल दस्तावेजों की जांच और संपत्तियों के सत्यापन की कार्रवाई जारी है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

क्या ब्रह्मांड बिग बैंग से नहीं बना? नई स्टडी में सामने आई 'बिग बाउंस' थ्योरी