Hanuman Chalisa

गोवा को भारत की आजादी के 14 साल बाद क्यों मिली मुक्ति? जानिए 'ऑपरेशन विजय' की पूरी कहानी

WD Feature Desk
बुधवार, 13 अगस्त 2025 (14:51 IST)
why does goa not celebrate independence day: भारत ने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आज़ादी हासिल की, लेकिन हमारा प्यारा राज्य गोवा तब भी पुर्तगाली शासन के अधीन था। यह एक ऐसा विरोधाभास था जिसने 14 साल तक भारतीय संप्रभुता पर एक सवालिया निशान लगाए रखा। जब भारत के बाकी हिस्सों में आज़ादी का जश्न मनाया जा रहा था, तब गोवा, दमन और दीव में पुर्तगाली हुकूमत का झंडा फहर रहा था। तो आखिर ऐसा क्यों हुआ, और गोवा को आज़ाद कराने के लिए क्या कदम उठाए गए? आइए, जानते हैं 'ऑपरेशन विजय' की पूरी कहानी।

पुर्तगालियों का विरोध और नेहरू की कूटनीति
भारत की आज़ादी के बाद, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पुर्तगालियों से बातचीत के ज़रिए गोवा, दमन और दीव को भारत को सौंपने की अपील की। लेकिन, पुर्तगाली शासक एंटोनियो सालाजार ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। उनका मानना था कि गोवा उनके साम्राज्य का एक हिस्सा है और इसे भारत को नहीं सौंपा जाएगा।
नेहरू शुरुआत में सैन्य कार्रवाई के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि बातचीत और कूटनीति से इस मुद्दे को सुलझाया जा सकता है। उन्होंने यह भी सोचा कि सैन्य कार्रवाई से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भारत की छवि को नुकसान पहुँच सकता है।

अहिंसक आंदोलन और बढ़ता जन आक्रोश
जब कूटनीति विफल रही, तो गोवा के लोगों ने खुद पुर्तगाली शासन के खिलाफ आवाज़ उठाई। डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे समाजवादी नेताओं ने गोवा में सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाए। भारतीय स्वयंसेवकों ने भी गोवा में प्रवेश कर विरोध प्रदर्शन किए। पुर्तगाली सेना ने इन प्रदर्शनों को क्रूरता से दबाया, जिससे कई लोगों की जानें गईं। इन घटनाओं ने भारत में जन आक्रोश को भड़का दिया और सरकार पर सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया।

ऑपरेशन विजय: भारत की सैन्य कार्रवाई
जब सभी शांतिपूर्ण प्रयास विफल हो गए, तब भारत सरकार ने आखिरकार सैन्य कार्रवाई का फैसला किया। इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन विजय' नाम दिया गया। ऑपरेशन विजय 18 दिसंबर 1961 को शुरू हुआ। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर पुर्तगाली ठिकानों पर हमला किया। भारतीय वायुसेना ने पुर्तगाली विमानों को नष्ट कर दिया, जबकि नौसेना ने गोवा की बंदरगाह को घेर लिया। भारतीय सेना ने ज़मीन से हमला किया। पुर्तगाली सेना, जो संख्या और हथियारों में भारतीय सेना से कहीं कम थी, 36 घंटे से भी कम समय में घुटनों पर आ गई। 19 दिसंबर 1961 को पुर्तगाली गवर्नर जनरल मैन्यूएल एंटोनियो वासलो ई सिल्वा ने आत्मसमर्पण के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कर दिए।

गोवा की मुक्ति और भारत में विलय
गोवा की मुक्ति के बाद, इसे दमन और दीव के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। 30 मई 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और वह भारत का 25वां राज्य बन गया।  इसलिए, गोवा की आज़ादी का जश्न 19 दिसंबर को मनाया जाता है, जो हमें उस वीरता और विजय की याद दिलाता है।
ऑपरेशन विजय न केवल गोवा के लोगों के लिए स्वतंत्रता लाया, बल्कि इसने भारतीय सेना की ताकत और दृढ़ संकल्प को भी दुनिया के सामने रखा। यह इस बात का प्रमाण था कि भारत अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
ALSO READ: भारत ने कैसे जीता सियाचिन, पढ़िए पाक के नापाक इरादों को ध्वस्त करने की कहानी ‘ऑपरेशन मेघदूत’

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

क्या E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान हो सकता है, आयोग के फैसले से शुरू हुई नई बहस

पत्नी ने घर छोड़ा तो बेटा बन गया हैवान, बुजुर्ग मां को इतना पीटा कि मौत हो गई, पुलिस ने किया गिरफ्तार

MoU मानो तभी खुलेगा Hormuz Strait, दुनिया के सबसे बड़े समुद्री रास्ते के लिए ईरान की नई शर्त

ISRO में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों के इस्तीफों से हलचल, सरकार ने सख्त किए नियम, Gaganyaan Mission से जुड़े कर्मियों पर विशेष फोकस

Royal Enfield Classic 350 का 2026 अपडेट लॉन्च, अब मिलेगा Slipper Clutch और Fast USB Type-C Charger; जानें नई कीमतें

सभी देखें

नवीनतम

चैट जीपीटी के ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग कमजोर होने का डर

अमरनाथ यात्रा 2026: क्या इस बार टूट जाएगा अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड?

पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में ट्रेन से टकराई स्कूल वैन, 2 बच्चों समेत 3 की मौत

20वें दिन भी जारी सोनम वांगचुक का अनशन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष एकजुट, क्या बोले पवन खेड़ा?

पानी की भाप छोड़ेगी, धुआं नहीं! पीएम मोदी ने दिखाई देश की पहली Hydrogen Train को हरी झंडी; जानें रूट और टाइमिंग

अगला लेख