Publish Date: Tue, 11 Feb 2020 (10:11 IST)
Updated Date: Wed, 12 Feb 2020 (11:26 IST)
एक धनपति था रथचाइल्ड। उसे एक भिखारी पर दया आ गई। उसने उसे बुलाया और कहा- तुम मेरे दफ्तर आ जाया करो। मैं हर महीने तुम्हें सौ डॉलर दे दिया करूंगा। भिखारी को विश्वास नहीं हुआ।
भिखारी रथचाइल्ड के दफ्तर पहुंचा तो सच में ही उसे सौ डॉलर मिल गए। फिर वह हर पहली तारीख को जाता और सौ डॉलर ऐसे ले जाता जैसे वह यहां पर काम करता हो। कोई दस साल तक ऐसा चलता रहा।
फिर एक दिन जब वह भिखारी आया तो क्लर्क ने कहा- इस महीने से तुम्हें पचास डॉलर ही मिलेंगे। भीखारी ने पूछा- ऐसा क्यों, क्या तुम्हारी तनख्वाह में भी कुछ कमी हुई है? क्लर्क ने कहा- नहीं। तब भिखारी ने गुस्से से कहा- तो ऐसा हमारे साथ ही क्यों हो रहा है।
क्लर्क ने कहा- मालिक की लड़की की शादी है। इसलिए उन्होंने सभी के दान को आधा कर दिया है। वह भिखारी एकदम आग बबूला हो गया। उसने कहा- बुलाओ मालिक को, मैं बात करना चाहता हूं। मेरे पैसे को काटकर अपनी बेटी की शादी में लगाने वाला वह कौन होता है।
रथचाइल्ड ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि मैं गया और मुझे बड़ी हंसी आई, लेकिन मुझे एक बात समझ में आ गई कि यही तो हम परमात्मा के साथ करते हैं।
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति मुफ्त की वस्तु या धन पर भी अपना अधिकार जताने लगता है जबकि उसे तो कृतघ्न होना चाहिए कि भगवान ने मुझे यह दिया या अब तक इतना दिया।