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Motivational Story : जिंदा तो सब हैं लेकिन जीने की इच्छा जरूरी

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यह कहानी ओशो रजनीश ने अपने किसी प्रवचन में सुनाई थी। यह बहुत ही प्रेरक कहानी है। वे लोग जो हताश-निराश रहते हैं,  आत्महत्या के बारे में सोचते रहते हैं या वे समझते हैं कि मैं जिंदगी में हार गया, अपने या दूसरों के कारण तो ऐसे लोगों को इस कहानी से प्रेरणा लेना चाहिए।
 
 
भगवान महावीर स्वामी जंगल से गुजरते थे। उनके एक शिष्य ने पूछा- आप कहते हैं कि प्रत्येक पत्थर, पौधे और व्यक्ति में जीवेषणा है। जिसको जितना जीना है वह उतना जिएगा। उसके जीवन को कोई रोक नहीं सकता। आप बताएं कि अभी मैंने जिस पौधे को उखाड़ फेंका है, अब वह जी पाएगा या नहीं?
 
 
महावीर स्वामी ने उस पौधे को देखा और फिर कहा- यह जरूर वृक्ष बनेगा। वह शिष्य हंसने लगा। कुछ दिनों बाद महावीर अपने शिष्यों के साथ उसी जंगल से लौटते हैं तो रास्ते में रुककर उस शिष्य से कहते हैं- देखो! तुमने जिस पौधे को उखाड़ फेंका था, उसकी जड़ ने पुन: जमीन पकड़ ली है। अब तुम्हारा इरादा क्या है?
 
 
शिष्य ने उस पौधे को पुन: उखाड़ कर बंजर भूमि पर फेंक दिया और कहा- अब यह कभी वृक्ष नहीं बन सकता।
 
 
कुछ दिनों बाद महावीर पुन: उसी रास्ते से गुजरते हैं और वहीं रुककर शिष्य से कहते हैं- देखो! तुमने जिस पौधे को दूसरी बार उखाड़ फेंका था अब पहले की अपेक्षा और अधिक जड़ बनाकर वह खड़ा हो गया है। अब तुम्हारा इरादा क्या है?
 
 
इस बार शिष्य के हाथ कांप जाते हैं और वह कहता है- आप सही कहते हैं भगवन।
 

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