दोनों हाथों से लूटकर, अलगाववादी बन गए अमीर।
उनके मंच से हटते ही, चैन की सांस ले रहा कश्मीर।।1।।
एक तरफ जांचों की आग है, दूसरी ओर ईडी का प्रहार।
अब किस गठबंधन की ओट में, छुपेगा लालू परिवार।।2।।
परिवारवाद का दानव, ले डूबा यूपी-बिहार।
गलते किसी हिमशिखर पर शायद, हो इसका अगला वार।।3।।
ऊर्जाहीन सब प्यादे सल्तनत के, असमंजस में सिपहसालार।
खुद मूक-बधिर है रानी, दिशाहीन छोटे सरकार।।4।।
सड़ी सरकारी मशीनरी का, चेहरा विकराल।
योगी की बनती साख का कर दिया, घर वालों ने कैसा हाल।।5।।
साठ मरें या सौ मरें, अफसरशाही को नहीं है पीर।
ये तो कफन बेचकर भी, खाएंगे खीर।।6।।
About Writer
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय....
और पढ़ें