येन-केन -प्रकारेण सत्ता को पा जाने की ही चाह क्यों है ?
राजनीति अपने स्थापित आदर्शों से यों गुमराह क्यों है ?
सर्वशक्तिमान मतदाता इतना निरीह और बेबस क्यों हैं ?
चुनाव प्रचार में उछाले गए मुद्दे इतने बेहूदे और बेकस क्यों हैं ?
सियासत में सिद्धान्तहीन लोगों की निर्विघ्न चलती मनमानी क्यों है ?
राजनीति की राह सुयोग्य युवाओं के लिए अनजानी क्यों है ?
जनशक्ति अपनी सामर्थ्य से बिलकुल अनजान, ऊंघती, सोती क्यों है ?
राजनीति कुछ हठधर्मियों की बरबस बन गई बपौती क्यों है ?
गुजरात की चुनावी गहमा गहमी से ये ही सब संकेत मिले हैं।
क्या चिन्तनशील मनों को चिन्तित करने वाले नहीं ये सिलसिले हैं ?
एक परिपक्व प्रजातन्त्र में जाति, धर्म, जनेऊ, मंदिर ही क्या मौजूं चर्चा के विषय हैं ?
यह प्रजातन्त्र ऐसे ही चले क्या यही बस हम सबका निर्णय है ?
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डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय....
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