Hanuman Chalisa

कविता : आज बांटते हैं.. रोशनी नन्हे दीप की..

ज्योति जैन
poem on deepak
 
न करना था...कर दिया..
बंटवारा इस धरती का...,
वो तुम्हारे पैरों तले जो है..!
पर धरा पर खिले फूलों की 
खुशबू का बंटवारा न कर सके...।
 
बंटवारा माथे ऊपर के आसमान का न कर सके...
तो चांद का ही कर दिया...
तेरा-मेरा करवाचौथ-ईद का चांद....
पर उन पंछियों का न कर सके,...
जो विचरते रहे,दूर क्षितिज तक...।
 
मगर इस बार कोई बंटवारा नहीं ..
हम बांटेंगे  मगर नफरत नहीं..सिर्फ मुहब्बत...
 
तो बांटने की प्रथा को जारी रखते हुए..
आज बांटते हैं.. रोशनी..नन्हे दीप की..
जो जले मेरी देहरी पर,उजाला हो तेरे आंगन में ....
जो जले तेरी देहरी पर,उजाला हो मेरे मन में..
इस तरह जले करोड़ों दीये और उजाला हो..
इस धरा पर,उस गगन में ..
समूची दुनिया के अंजुमन में ..

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

इलाज आपकी थाली में, ध्यान नहीं दिया तो साइलेंट किलर साबित हो सकता है एनीमिया

घर संभालने वाली महिलाओं को 30 हजार; पर 'हाउस हसबैंड्स' का क्या?

भरपूर लाभ के लिए रोज करें मंडूकासन; जानिए इसे करने का सही तरीका

हिंदी साहित्य में पहेली के रूप में लिखी जाने वाली एक लयात्मक कविता: कह मुकरियां

सभी देखें

नवीनतम

'अष्टांग योग गीत'

प्रेरणादायक कहानी: मीनू की 'कूल' तरकीब: जब परिंदे बने दोस्त

स्वस्थ, जागरूक और विकसित भारत की आधारशिला है 'योग'

नॉर्वे की युवराज्ञी अस्पताल में और बेटा जेल में

Best gifts for dad: फादर्स डे पर अपने पिता को दें इन 5 में से कोई एक यादगार‍ गिफ्ट

अगला लेख