हाथ मिलाने की जगह,करें नमस्ते आप।
कोरोना से भी बचें, मन पर छोड़ें छाप।।
कोरोना से मच गया,दुनिया में कुहराम।
हर कोई भयभीत हो, जपे राम का नाम।।
बंद सिनेमाघर हुए, मॉल पड़े सुनसान।
आलय में अवकाश का,भी आया फरमान।।
हाथ मिलाने से बचें, रहें भीड़ से दूर।
कोरोना से जंग में,सजग रहें भरपूर।।
साफ-सफाई से रहें, लें ताज़ा आहार।
सर्दी-खाँसी हो अगर, करें तुरत उपचार।।
कोरोना के खौफ से,चमक उठा बाज़ार।
सौदागर सब मौज में, जनता है लाचार।।
घर से बाहर जब चलें,मास्क लगायें आप।
जगह-जगह पर घूमते, कोरोना के बाप।।
तुलसी का सेवन करें,चलें योग की ओर।
कोरोना के खौफ़ से, पड़ें नहीं कमज़ोर।।
कोरोना से सीख लो, अब भी ऐ इन्सान।
कुदरत को छेड़ो नहीं,उसका रक्खो मान।।
About Writer
सुबोध श्रीवास्तव
परिचय : जन्म- 4 सितंबर 1966, शिक्षा- परास्नातक। 'आज' (हिन्दी दैनिक), कानपुर में कार्यरत। कई पुस्तकों का प्रकाशन, देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। दूरदर्शन, आकाशवाणी से प्रसारण। गणेश शंकर विद्यार्थी अतिविशिष्ट सम्मान प्राप्त तथा 'काव्ययुग' ई-पत्रिका का संपादन।....
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