प्रकृति के गालों पर ये टेसुई (पलाशी ) गुलालों वाले दिन।
राधा / माधव के मनों में अरमानों की उछालों वाले दिन ।।
हर डाली को , लताओं को , पुष्पों को झकझोरती
ये फागुनी हवा की शोखी भरी अल्हड़ चालों वाले दिन ।। 1 ।।
हर धड़कन में बजती मादक मृदंगों वाले दिन।
हर युवा मन में उभरती अनोखी उमंगों वाले दिन ।।
तितलियों के परों पर सजते हजार रंगों वाले दिन।
आकाश में क्रीड़ा करते सतरंगी विहंगों वाले दिन ।। 2 ।।
पवन की सरसराहट में सुनाई पड़ते मधुरिम साज वाले दिन।
मौसमों की करवटों के अनूठे अन्दाज वाले दिन ।।
हर दिशा में उभरते नशीले मौसमी रागो -रंगों से ,
वसन्तोत्सव की मदभरी आहटों ,आगाज़ वाले दिन ।। 3 ।।
About Writer
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय....
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