Hanuman Chalisa

कविता : फिर बाद बरस के

Webdunia
स्वाति गौतम
फिर इस साल बाद बरस के
कुछ दीप मैंने जलाए हैं 
अपने मन के कुछ उजियारे
फिर तुझ तक पहुंचाए हैं
 
कुछ खील, बताशे, मिठाई से
रिद्धि-सिद्धि की तैयारी है 
तेरे स्वागत में गली, मोहल्ले, नुक्कड़ तक 
ज्योति की लड़ी लगाई है
 
जो घुला-मिला सा रूप जिसे
आधुनिक सभ्यता कहते हैं
वहां कुछ लोग सड़कों पर गोबर, कपास, सींक
तलाशते पाए हैं 
फिर इस साल एक टीके से
कानून-व्यवस्था हारी है
 
फिर इस साल छोटे मन के कोनों में
मैंने आस्था का अंकुर उगाया है
राम-रावण के भेद को 
कंधे पर बिठा दिखाया है 
मर्यादा, शील, क्षमा, दया
तेरे रुद्ररूप का दर्शन उनको करवाया है
 
क्यों मर्यादापुरुषोत्तम है ?
क्यों गोवर्धन गिरधारी है ?
तेरी हर छवि क्यों जग से निराली है ?
 
जो बढ़कर जब परिपक्व बने
हर कदम उसे ये भान रहे
जब पहुंचे चांद पे वो
कहे गर्व से हर जन से
जाने कितने किस्से मेरी मां ने
चंदा मामा के सुनाए हैं

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

क्या थम जाएगा ईरान युद्ध या यह केवल तूफान से पहले की शांति है?

घर पर बनाएं कीवी आइसक्रीम, जानिए इस सुपरफ्रूट के 6 हेल्दी फायदे

आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

LPG गैस के बिना शाकाहारी व्यंजन: 10 स्वादिष्ट और सेहतमंद चाट रेसिपी

सभी देखें

नवीनतम

नक्सल मुक्त भारत की सफलता के बाद अब नई चुनौती

Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती पर अपने प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामनाएं और स्टेटस, देखते ही खुश हो जाएगा मन

पुण्यतिथि विशेष: गुरु हरि किशन कौन थे, जानें 'बाल गुरु' का सिख धर्म में योगदान

April Fools Day 2026: आज के दिन झूठ बोलना पाप नहीं, कला है (अप्रैल फूल डे)

ईरान पर भारत का रुख सही

अगला लेख