वे देश के अन्नदाता हैं वो तमाम कष्ट सह पेट पालता है तमाम जनता का अकाल, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि जैसी तमाम विपदाएं आ जाती हैं उसके पास एक परम मित्र की तरह या डायबिटीज की तरह बिना दरवाजे की कॉलबेल को बजाए वह जिंदा रहता इन तमाम विपदाओं को झेलता मृत्यु...