Publish Date: Sat, 25 Jul 2026 (12:50 IST)
Updated Date: Sat, 25 Jul 2026 (12:56 IST)
25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी का महाव्रत रखा जा रहा है। आज से 4 माह के लिए भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाएंगे। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु को क्षीरसागर में शयन कराने (सुलाने) के लिए नीचे दिए गए प्रसिद्ध और पौराणिक मंत्र का जाप किया जाता है।
मुख्य शयन मंत्र
सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्।
विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत् सर्वं चराचरम्॥
मंत्र का अर्थ: "हे जगन्नाथ! आपके सो जाने पर यह संपूर्ण जगत सो जाता है और आपके जागने पर ही संपूर्ण चराचर (सजीव व निर्जीव) संसार जाग उठता है।"
शयन कराते समय इस मंत्र का भी जप किया जाता है:
सोमनाथं नमस्कृत्य क्षीरोदं क्षीरशायिनम्।
नारायणं च सर्वात्मानं योगनिद्रां नमाम्यहम्॥
मंत्र का अर्थ: "क्षीरसागर में शयन करने वाले, सभी आत्माओं के आधार श्री नारायण को प्रणाम करके मैं भगवान की योगनिद्रा को नमस्कार करता हूँ।"
पूजा की संक्षिप्त विधि
शयन कराने का समय: देवशयनी एकादशी की पूजा और आरती करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या शालिग्राम जी को पंचामृत से स्नान कराएं।
वस्त्र व श्रृंगार: उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं और तुलसी दल, पीले फूल तथा नैवेद्य अर्पित करें।
शयन प्रक्रिया: इसके बाद भगवान को एक छोटे से सुंदर बिस्तर/झूले पर विराजमान करें और ऊपर दिए गए मंत्रों का उच्चारण करते हुए भावपूर्वक उन्हें विश्राम (योगनिद्रा) कराएं।
विशेष मान्यता: देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास कहा जाता है। इसके बाद कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी पर भगवान को पुनः जगाया जाता है।