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देवशयनी एकादशी पर करें ये 2 कार्य तो मिलेंगे 2 लाभ

अनिरुद्ध जोशी
भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी देवशयनी को चार माह के लिए सो जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। आषाढ़ शुक्ल एकादशी के बाद पूर्णिमा से चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है। इस दौरान यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, दीक्षाग्रहण, ग्रहप्रवेश, यज्ञ आदि धर्म कर्म से जुड़े जितने भी शुभ कार्य होते हैं वे सब त्याज्य होते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्री हरि के शयन को योगनिद्रा भी कहा जाता है।
 
करें दो कार्य :
1. इस दौरान विधिवत व्रत रखने से पुण्य फल की प्राप्त होती है और व्यक्ति निरोगी होता है।
2. इस दिन प्रभु हरि की विधिवत पूजा करने और उनकी कथा सुनने से सभी तरह के संकट कट जाते हैं।
 
लाभ :
1. देवशयनी एकादशी का व्रत करने से सिद्धि प्राप्त होती है।
2. यह व्रत सभी उपद्रवों को शांत कर सुखी बनाता है और जीवन में खुशियों को भर देते हैं।

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