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Makhana Board: मोदी जी ने किया मखाना बोर्ड का शुभारम्भ, जानिए बिहार में कैसे होता है मखाना उत्पादन

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WD Feature Desk

, मंगलवार, 16 सितम्बर 2025 (17:48 IST)
PM Modi Launches National Makhana Board: मखाना, जिसे फॉक्स नट्स या कमल के बीज के रूप में भी जाना जाता है, एक स्वादिष्ट और पौष्टिक स्नैक है। यह भारत में व्यापक रूप से उगाया जाता है, और बिहार इसका सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर में 90% मखाने का उत्पादन भारत करता है, और भारत में 80% मखाना बिहार में होता है। अपने बिहार दौरे पर पीएम मोदी ने सोमवार को मखाना बोर्ड का शुभारंभ किया. दावा किया गया है कि अब बिहार में मखाना उत्पादन और तेजी से बढ़ेगा. आइये आज आपको बिहार में मखाना उत्पादन से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी बताते हैं। 
बिहार में मखाने की खेती का क्या है इतिहास
मखाना की खेती का इतिहास बिहार में सैकड़ों साल पुराना है. मखाने की खेती आमतौर पर तालाबों और स्थिर जलाशयों में की जाती है. मखाना का बीज जलकुंभी जैसे पौधों से जुड़ी बड़ी पत्तियों पर पनपता है. मखाने को निकालना बहुत परिश्रम का काम होता है. गहरे पानी में उतरकर किसान गाद से भरे बीजों को इकट्ठा करते हैं. इसी प्रक्रिया के कारण मखाने इतने महंगा और मूल्यवान मने जाते हैं. प्राचीन ग्रंथों और आयुर्वेदिक चिकित्सा में भी मखाने का उल्लेख मिलता है. वात-पित्त-कफ में मखाने  का सेवन आदर्श माना गया है. मखाने का सेवन बांझपन से लेकर हृदय रोग तक में उपयोगी माना जाता है.
 
बिहार कैसे बना मखाने का गढ़?
भौगोलिक स्थिति: बिहार के मिथिला और कोसी जैसे क्षेत्रों में तालाबों और स्थिर जलाशों की संख्या अत्यधिक है, जो मखाने की फसल के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं.
पारंपरिक खेती: मखाना बिहार की पारंपरिक खेती है और यहां के किसान सैकड़ों सैलून से मखाना उत्पादन की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.
जलवायु: बिहार की अनुकूल मानसूनी बारिश और स्थिर जलाशयों की बड़ी संख्या मखाना उत्पादन के लिए आदर्श मानी जाती है.
 
कैसे होता है मखाना उत्पादन: (Makhana Production)
मखाना उत्पादन एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई चरण शामिल होते हैं।
1. बीज की बुवाई (Seed Sowing)
मखाने के बीज को तालाबों या गड्ढों में दिसंबर के महीने में बोया जाता है। बीज बोने से पहले तालाब की सफाई करना जरूरी है। बीजों के बीच की दूरी का भी ध्यान रखना होता है। 30 दिनों के अंदर यह देखा जाता है कि बीज में अंकुर आ रहा है कि नहीं।
 
2. बीजों को इकट्ठा करना और साफ करना (Collecting and Cleaning the Seeds)
बीजों को इकट्ठा करने का काम आसान नहीं होता है। इन्हें गोता लगाकर या बांस के जरिए पानी से निकाला जाता है। इसके बाद इन्हें बड़े-बड़े बर्तनों में रखकर लगातार हिलाया जाता है। ऐसा करके मखाने के ऊपर लगी गंदगी साफ हो जाती है। इसके बाद इन्हें पानी से धोया जाता है।
 
3. बीजों को सुखाना और फ्राई करना (Drying and Frying the Seeds)
साफ हो चुके बीज को बैग्स में भरकर सिलेंड्रिकल कंटेनर में इन्हें भरा जाता है। इस कंटेनर को काफी देर तक जमीन पर रोल किया जाता है, जिससे बीज स्मूद बन जाएं। इसके बाद इन बीजों को अगले दिन के लिए तैयार किया जाता है। अगले दिन बीज को कम से कम 3 घंटे के लिए सुखाया जाता है। जब मखाने अच्छी तरह से सूख जाते हैं, तो उन्हें फ्राई किया जाता है। एक तय समय तक इस पूरे प्रोसेस को करना होता है। इन्हें फ्राई करने के बाद बांस के कंटेनर में स्टोर किया जाता है, जिसे खास कपड़े से ढका जाता है। तापमान को सही रखने के लिए उसपर गोबर का लेप लगाया जाता है। कुछ घंटे के बाद फिर से इन्हें फ्राई किया जाता है और यही प्रोसेस फॉलो किया जाता है। एक बार बीज फट गया तो उसमें से सफेद मखाना निकलता है।
 
मखाने के फायदे (Benefits of Makhana)
मखाना एक पौष्टिक स्नैक है जो हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है।
वजन घटाने में मदद करता है: मखाने में कैलोरी की मात्रा कम होती है और फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो वजन घटाने में मदद करता है।
डायबिटीज को नियंत्रित करता है: मखाना ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है।
हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा: मखाना हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है क्योंकि इसमें मैग्नीशियम और पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है।
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर: मखाना एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करता है।
मखाना एक स्वादिष्ट और पौष्टिक स्नैक है जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। बिहार मखाना उत्पादन में अग्रणी राज्य है, और सरकार द्वारा मखाना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

 

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